विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने जिला मुख्यालय के बड़ौद रोड चौराहे पर धरना देकर प्रदर्शन किया।
विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने जिला मुख्यालय के बड़ौद रोड चौराहे पर धरना देकर प्रदर्शन किया।
शिक्षक पात्रता परीक्षा के विरोध में निकाली गई रैली। जनप्रतिनिधियों को सौपा गया ज्ञापन
एसडीएम ने कहा- पुलिस बल के साथ कार्रवाई जारी रहेगी, विधायक में व्यापारियों को मध्यस्थता का आश्वासन दिया।
कांग्रेस ने प्रमुख मांगों में केला फसल के लिए बीमा योजना लागू करने, समर्थन मूल्य पर गेहूं-चना की खरीदी तुरंत शुरू करने, प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान का शत-प्रतिशत मुआवजा देने और उपार्जन केंद्रों की अव्यवस्थाएं सुधारने की बात कही है।
जिला कांग्रेस कमेटी और किसान कांग्रेस कमेटी द्वारा किसानों की समस्याओं को लेकर माधवगंज पर दिया गया धरना। कलेक्टर से मिलने कलेक्ट्रेट जाते समय पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रोका।
कलेक्टर चेंबर के बाहर चैनल गेट पर कर्मचारियों ने ताला लगा दिया था। जिस पर कांग्रेसियों ने उस चैनल गेट को भी धक्का मार मार के तोड़ दिया। पुलिस के पुख्ता इंतजाम के बाद भी कांग्रेसी कलेक्टर के चेंबर तक पहुंच गए।
शिक्षकों का कहना है कि पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच नए सिरे से तैयारी करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। यह निर्णय शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने वाला है।
कांग्रेस के नेताओं ने कहा कि भाजपा सरकार की नीतियां किसान विरोधी है।
संघ के नेताओं का कहना था कि गेहूं खरीदी में लगातार देरी हो रही है, जबकि कई किसानों के पास अनाज रखने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है और फसल खुले में पड़ी हुई है। आंधी-बारिश के चलते नुकसान हो रहा है।
लोगों का कहना है कि पिछले तीन वर्षों से मुख्य सड़क पर दुकान होने के कारण क्षेत्र में मारपीट, गाली-गलौज और जाम की स्थिति बनी रहती थी। हाल ही में दुकान को गली के अंदर शिफ्ट किया गया था, जिससे क्षेत्र में शांति बनी हुई थी।
हाल ही में हुई ओलावृष्टि और खराब मौसम के कारण गेहूं की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि किसानों को डीजल नहीं मिल पा रहा है, गृहणियों को गैस समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इसके अलावा कई अन्य मांगों को लेकर कांग्रेस के पदाधिकारियों ने जनता के बीच अपनी बात रखी और केंद्र सरकार को आड़े हाथ लिया।
काफी मशक्कत के बाद नेता प्रतिपक्ष और सीमित संख्या में रहवासियों को निगम परिसर के अंदर जाने दिया गया, जहां उन्होंने एकत्रित होकर अधिकारियों को मौके पर बुलाने की मांग रखी।
जब ग्रामीणों ने पूरे मामले की शिकायत वरिष्ठ अधिकारी से की, तो वहां भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला। विवाद बढ़ने पर डायल-112 और स्थानीय पुलिस को मौके पर पहुंचना पड़ा।