अखिल भारतीय सनातन परिषद के संभाग अध्यक्ष महंत महावीर नाथ महाराज ने कहा कि यदि इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं, तो यह समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होना जरूरी है।
अखिल भारतीय सनातन परिषद के संभाग अध्यक्ष महंत महावीर नाथ महाराज ने कहा कि यदि इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं, तो यह समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होना जरूरी है।
17 अप्रैल को बाबा साहब की जयंती के उपलक्ष्य में गांव में जुलूस निकाला जाना था। उससे पहले ही कुछ शरारती तत्वों ने माहौल खराब करने की नीयत से बैनर को नुकसान पहुंचाया, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। घटना की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में समाजजन एकत्रित हुए और जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
इस घटना के विरोध में ग्राम रोजगार सहायक संघ ने जनपद सीईओ और थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपकर आरोपियों के खिलाफ सख्त धाराएं बढ़ाने और तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है। साथ ही मनरेगा के एपीओ रितेश सोनी पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
पार्षद सदन में गंदा पानी बोतलों में भरकर बैठक में पहुंचे थे और सीधे नगर निगम कमिश्नर को थमाते हुए कहा यही पानी आप भी पीकर देखिए, जनता को तो यही पिलाया जा रहा है।
81 बच्चों को जबलपुर और बाकी को कटनी के बाल गृह में रखा गया है। वहीं, मुस्लिम समुदाय ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे गलत बताया है।
वई जनपद पंचायत अध्यक्ष मोहनी आनंद मिश्रा ने आज बुधवार 8 अप्रैल को अब सीधे कलेक्टर को ज्ञापन सौंप कर मोर्चा खोल दिया है। आरोप है कि शराब पीकर लोग ऐसी गाली-गलौज और बवाल काटते हैं कि बेटियों का घर से निकलना दूभर हो गया है।
मामला इतना बढ़ गया कि अधिकारी सहित उनकी पत्नी ने कथित तौर पर पुलिस के सामने बंदूक दिखा दी। अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
विरोध बढ़ता देख एजेंसी के कर्मचारियों ने ऑफिस में ताला लगा दिया और वहां से चले गए, जिससे लोगों का गुस्सा और बढ़ गया। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला।
प्रदर्शनकारियों ने ईंधन की बढ़ती कीमतों और बाजार में इसकी अपर्याप्त उपलब्धता को सरकार की बड़ी विफलता करार दिया।
महंगाई के अलावा, कांग्रेस ने शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। कार्यकर्ताओं ने स्थानीय सांदीपनी विद्यालय के खराब परीक्षा परिणाम पर गहरी नाराजगी जताई और जिम्मेदार शिक्षकों के तत्काल स्थानांतरण की मांग की।
आरोप है कि आशा कार्यकर्ताओं को वर्ष 2021 से TBI (टीबी प्रोत्साहन राशि) का भुगतान नहीं किया गया है। लगभग 700 रुपये प्रति माह की दर से यह बकाया पिछले 5 वर्षों से अटका हुआ है।