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बारिश ने दिया धोखा, अब चंबल नहर ही सहारा: पानी की मांग को लेकर श्योपुर में किसानों का धरना

कम बारिश से परेशान श्योपुर के किसानों ने चंबल दाहिनी मुख्य नहर में पानी छोड़ने की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन किया। किसानों का कहना है कि समय पर सिंचाई नहीं मिली तो धान सहित खरीफ की फसल बर्बाद हो जाएगी। प्रशासन ने मांग शासन तक पहुंचाने का आश्वासन दिया है।

By: BS Yadav 
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बारिश ने दिया धोखा, अब चंबल नहर ही सहारा: पानी की मांग को लेकर श्योपुर में किसानों का धरना

श्योपुर: कमजोर मानसून और कम बारिश से परेशान श्योपुर जिले के किसानों ने सोमवार को चंबल दाहिनी मुख्य नहर में पानी छोड़े जाने की मांग को लेकर श्योपुर-कोटा हाईवे पर ढोटी गांव के पास धरना-प्रदर्शन किया। किसानों का कहना है कि यदि जल्द ही कोटा बैराज से नहर में पानी नहीं छोड़ा गया तो धान सहित खरीफ की फसल बर्बाद हो जाएगी।

धरने के दौरान किसानों ने बताया कि जिले में अल्प वर्षा के कारण खेतों में सिंचाई का संकट गहरा गया है। उनका आरोप है कि बिजली की अनियमित आपूर्ति और कम वोल्टेज के कारण भी सिंचाई प्रभावित हो रही है। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।

किसान नेता राधेश्याम मीणा मूंडला ने बताया कि कई किसान धान की रोपाई कर चुके हैं, जबकि कई रोपाई की तैयारी में हैं। ऐसे समय में चंबल दाहिनी मुख्य नहर में पानी छोड़ा जाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि किसान पहले भी ज्ञापन और प्रदर्शन के माध्यम से प्रशासन को अपनी समस्या से अवगत करा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।

उन्होंने यह भी कहा कि मध्य प्रदेश सरकार ने राजस्थान की लेफ्ट कैनाल के लिए गांधी सागर बांध से पेयजल की आवश्यकता के मद्देनजर पानी छोड़ा है, लेकिन कोटा बैराज से सिंचाई के लिए पानी रिलीज नहीं किया गया है। यदि जल्द निर्णय नहीं हुआ तो किसान व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

प्रेमसर निवासी किसान जपित सिंह ने कहा कि क्षेत्र में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है और खेतों में सिंचाई के लिए पानी नहीं बचा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नहर में पानी नहीं छोड़ा गया तो किसान चक्का जाम सहित बड़ा आंदोलन करेंगे।

धरने में पहुंचे भाजपा के पूर्व विधायक ब्रजराज सिंह चौहान ने भी किसानों की मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष कम बारिश के कारण चंबल कमांड क्षेत्र में धान की फसल संकट में है। यदि समय रहते नहर में पानी छोड़ा जाता है तो माइनर नहरों तक पानी पहुंचेगा और किसानों की फसल बचाई जा सकेगी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने संबंधित मंत्री से चर्चा कर पूरी जानकारी भी भेजी है।

वहीं, सिंचाई विभाग के कार्यपालन यंत्री चैतन्य चौहान ने बताया कि चंबल नहर प्रणाली मूल रूप से रबी फसल की सिंचाई के लिए विकसित की गई थी। उन्होंने कहा कि किसानों की मांग शासन और कोटा स्थित वरिष्ठ अधिकारियों को भेज दी गई है। हालांकि वर्तमान में गांधी सागर बांध का जलस्तर इतना नहीं है कि अतिरिक्त पानी सिंचाई के लिए छोड़ा जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजस्थान के लिए भी केवल पेयजल आवश्यकता के अनुसार पानी छोड़ा गया है। विभाग किसानों की मांग पर लगातार उच्च स्तर पर चर्चा कर रहा है और परिस्थितियों के अनुसार समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है।

रिपोर्ट : जेपी शर्मा

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