पहले कफ सिरप से मौत, उसके बाद गंदे पानी से त्रासदी और अब NICU में चूहे। पटवारी ने कहा कि इन सभी घटनाओं में एक समान पैटर्न दिखाई देता है।
पहले कफ सिरप से मौत, उसके बाद गंदे पानी से त्रासदी और अब NICU में चूहे। पटवारी ने कहा कि इन सभी घटनाओं में एक समान पैटर्न दिखाई देता है।
घटना के बाद जिला अस्पताल चौकी पुलिस ने मामला दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। गुरुवार को शव का पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंप दिया।
स्थानीय निवासियों नो बताया कि खुदाई के कारण पाइपलाइन टूट गई, जिससे गंदा और बदबूदार पानी मिक्स होकर नलों में आ रहा है। पानी इतना बदबूदार है कि उपयोग करना तो दूर, पास खड़ा रहना भी मुश्किल है।
वहीं नगर निगम का कहना है कि ढाबा रोड पर मार्ग चौड़ीकरण के तहत जर्जर भवन को सुरक्षा के साथ हटाया जा रहा था। पूरी कार्रवाई अधिकारियों की निगरानी में और बैरिकेडिंग के साथ की गई।
मामले को गंभीर मानते हुए आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने कार्रवाई की है।
जीतेंद्र (जीतू) पटवारी ने कहा है कि सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि आम जनता द्वारा रोजाना उपयोग में लाए जाने वाले दूध, मावा, पनीर और घी जैसे डेयरी उत्पाद ही सबसे अधिक मिलावटी पाए जा रहे हैं। यह स्थिति सीधे-सीधे लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली के तार काफी पुराने और जर्जर थे, जिसकी शिकायत जिम्मेदार विभाग को पहले भी की जा चुकी थी। लेकिन विभाग के अधिकारी कर्मचारियों ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
जब स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई, तो आनन-फानन में उन्हें भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद साफ किया कि मरीज की स्वांस नली गंभीर रूप से डैमेज हो चुकी है।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने पहले गैस की समस्या बताकर भर्ती किया था, लेकिन इलाज के दौरान अचानक मरीज की जान चली गई।