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प्रदेश में लापरवाही का खतरनाक सिलसिला, स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त- जीतू पटवारी

पहले कफ सिरप से मौत, उसके बाद गंदे पानी से त्रासदी और अब NICU में चूहे। पटवारी ने कहा कि इन सभी घटनाओं में एक समान पैटर्न दिखाई देता है।

By: Naredra 
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प्रदेश में लापरवाही का खतरनाक सिलसिला, स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त- जीतू पटवारी

भोपालः मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जितेंद्र (जीतू) पटवारी ने प्रदेश में लगातार सामने आ रही गंभीर घटनाओं को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि प्रदेश में “लापरवाही का खतरनाक सिलसिला” चल रहा है, जिसकी कीमत आम जनता अपनी जान देकर चुका रही है।

दवा नियंत्रंण व्यवस्था की खुली पोल- जीतू पटवारी

उन्होंने कहा कि एक ओर जहरीले कफ सिरप के सेवन से करीब 25 लोगों की मौत ने दवा नियंत्रण व्यवस्था की पोल खोल दी है, वहीं दूसरी ओर हज़ारों करोड़ के बजट वाली इंदौर नगर निगम ने 35 लोगों को पानी में ज़हर देकर सरकारी हत्या कर दी और ज़िम्मेदारी से भागने के लिए पूरी भाजपा आज सांप्रदायिक रंग देकर प्रदेश की फ़िज़ा बिगाड़ने का काम कर रही है। इंदौर में दूषित पानी पीने से 35 से अधिक लोगों की मौत ने प्रशासनिक तंत्र की असफलता को उजागर कर दिया है। इन दोनों घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकार बुनियादी स्वास्थ्य सुरक्षा तक सुनिश्चित करने में विफल रही है।

‘गंभीर घटनाओं को बाद भी सरकार ने नहीं लिया सबक’

श्री पटवारी ने कहा कि इन घटनाओं के बाद भी सरकार ने कोई सबक नहीं लिया और अब भोपाल स्थित एम्स भोपाल के नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में चूहों की मौजूदगी की खबर ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। NICU वह स्थान होता है जहां सबसे ज्यादा संवेदनशील और गंभीर स्थिति में नवजात शिशुओं का इलाज होता है। वहां चूहों का मिलना न केवल गंभीर लापरवाही है, बल्कि मानवता के खिलाफ अपराध के समान है।

सरकार और प्रशासन पूरी तरह से संवेदनहीन- श्री पटवारी

उन्होंने कहा यह लापरवाही कोई पहली बार नहीं है, पिछले वर्ष इन्दौर के एमवाय अस्पताल में चूहों के काटने से दो मासूम नवजातों की मौत हो चुकी थी। उस मामले में न्यायालय ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए एक डॉक्टर सहित कई लोगों को निलंबित किया था। इसके बावजूद ऐसी घटनाओं का दोहराया जाना यह दर्शाता है कि सरकार और प्रशासन पूरी तरह संवेदनहीन हो चुका है। श्री पटवारी ने विशेषज्ञों का हवाला देते हुए कहा कि NICU जैसे अत्यंत नियंत्रित और संक्रमण-मुक्त वातावरण वाले वार्ड में चूहों की मौजूदगी अत्यंत खतरनाक है। नवजात शिशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कमजोर होती है, और चूहे बैक्टीरिया, वायरस एवं अन्य रोगजनक सूक्ष्मजीवों के वाहक होते हैं, जो गंभीर संक्रमण का कारण बन सकते हैं।

एम्स के यह हाल, तो कैसे होंगे सरकारी अस्पताल?

उन्होंने कहा कि भोपाल एम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में भी यदि यह स्थिति है, तो प्रदेश के अन्य सरकारी अस्पतालों की स्थिति का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। यह केवल एक अस्पताल की समस्या नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता का प्रतीक है।

श्री पटवारी ने कहा कि इन सभी घटनाओं में एक समान पैटर्न दिखाई देता है।

  • दवा नियंत्रण में लापरवाही
  • पेयजल व्यवस्था में विफलता
  • अस्पतालों में साफ-सफाई और पेस्ट कंट्रोल की कमी
  • शिकायतों के बावजूद समय पर कार्रवाई का अभाव
  • और सबसे महत्वपूर्ण, जवाबदेही का पूरी तरह अभाव

जीतू पटवारी ने कहा कि जब तक कोई बड़ी दुर्घटना नहीं होती, तब तक प्रशासन हरकत में नहीं आता, और जब तक मीडिया में मामला नहीं उठता, तब तक जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे रहते हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या मध्यप्रदेश की जनता की जान इतनी सस्ती हो गई है कि बार-बार की लापरवाही के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं? “आखिर कब तक मासूम बच्चे, गरीब परिवार और आम नागरिक इस लापरवाह सिस्टम की बलि चढ़ते रहेंगे?”

सभी गंभीर मुद्दों पर ठोस कार्रवाई की मांग

अंत में श्री पटवारी ने राज्य सरकार से मांग की है कि इन गंभीर मुद्दों पर शीघ्र, ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

 

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