मध्य प्रदेश के पन्ना में भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथयात्रा इस वर्ष भी पूरे धार्मिक उत्साह, आस्था और भव्यता के साथ निकाली गई। मंदिरों की नगरी के रूप में प्रसिद्ध पन्ना में आयोजित यह रथयात्रा पुरी की परंपरा की तर्ज पर निकाली जाती है और इसे देश की प्राचीन रथयात्राओं में शामिल माना जाता है। यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा के जयघोष से पूरे शहर को भक्तिमय बना दिया।
रथयात्रा का शुभारंभ श्री जगदीश स्वामी मंदिर (बड़ा दिवाला) से हुआ। पारंपरिक वाद्ययंत्रों, भजन-कीर्तन और धार्मिक जयघोष के बीच भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को सुसज्जित रथों में विराजमान कर नगर भ्रमण के लिए रवाना किया गया। यात्रा का समापन लखूरन बाग में हुआ, जहां भगवान के रात्रि विश्राम की परंपरा निभाई गई।
रथयात्रा के दौरान पन्ना राजपरिवार ने अपनी वर्षों पुरानी धार्मिक परंपरा का निर्वहन किया। मंदिर के पुजारियों के साथ महाराज छत्रसाल द्वितीय ने भगवान की आरती कर विग्रहों को गर्भगृह से बाहर लाकर रथों में विराजमान कराया। इसके बाद युवराज ने चंवर डुलाकर और स्वयं रथ खींचकर यात्रा का शुभारंभ किया, जिससे श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।

ऐतिहासिक रथयात्रा का स्वागत पुलिस द्वारा सलामी देकर किया गया। यात्रा मार्ग पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे, जिन्होंने भगवान के दर्शन किए और विभिन्न स्थानों पर पुष्पवर्षा कर रथयात्रा का स्वागत किया। पूरे नगर में धार्मिक वातावरण देखने को मिला और जयघोष से माहौल भक्तिमय हो उठा।
रथयात्रा में रावतपुरा सरकार सहित कई संत-महात्माओं ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उनके सान्निध्य में आयोजित इस धार्मिक आयोजन ने श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अनुभव को और अधिक विशेष बना दिया। हर वर्ष की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में लोगों ने रथयात्रा में शामिल होकर अपनी आस्था प्रकट की।