यह कितनी दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि देश के कृषि मंत्री के अपने ही गृह राज्य में किसान एक अदद बोरे के लिए तरस रहे हैं! संसद में "जनसंपर्क अधिकारी" की तरह केंद्र सरकार की झूठी प्रशंसा कर राष्ट्रीय आलोचना का केंद्र बने केंद्रीय कृषि मंत्री अपने मूल दायित्व को भूल चुके हैं!
