गोरखपुर: सावन का अंतिम सोमवार… महादेव की भक्ति में डूबा गोरखपुर और पचदेवरी से सामने आई आस्था की ऐसी तस्वीर, जिसे देखकर आप भी कुछ पल के लिए ठहर जाएंगे। ये सैकड़ों युवा पैदल नहीं चल रहे, बल्कि जमीन पर दंडवत करते हुए करीब तीन किलोमीटर का सफर तय कर रहे हैं। हर बार जमीन पर लेटना… फिर उठना… कुछ कदम आगे बढ़ना और दोबारा दंडवत करना। मंजिल है बाबा निंबेश्वर नाथ का दरबार और यह कठिन संकल्प पिछले चार साल से लगातार निभाया जा रहा है।
दंडवत करते हुए 3 किलोमीटर का सफर
गांव की गलियों से निकलता सैकड़ों युवाओं का यह कारवां और मंजिल सिर्फ एक—बाबा निंबेश्वर नाथ का दरबार।पचदेवरी के सैकड़ों युवा सावन के अंतिम सोमवार पर करीब तीन किलोमीटर की दंडवत यात्रा पर निकलते हैं।कदम भले छोटे हों, लेकिन संकल्प बेहद बड़ा है।जमीन पर लेटकर दंडवत… फिर उठकर कुछ कदम आगे… और दोबारा वही प्रक्रिया।रास्ता लंबा है, सफर कठिन है, लेकिन जुबां पर महादेव का नाम और दिल में अटूट आस्था।‘हर-हर महादेव’ के जयकारों के बीच धीरे-धीरे आस्था का यह कारवां बाबा निंबेश्वर नाथ के दरबार तक पहुंचता है।
मंदिर पहुंचकर करते हैं पूजा और जलाभिषेक
मंदिर पहुंचने के बाद श्रद्धालु सबसे पहले बाबा की परिक्रमा करते हैं।इसके बाद मंदिर परिसर में मौजूद पवित्र कुंड में स्नान करते हैं और फिर मंदिर पहुंचकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना और जलाभिषेक करते हैं।स्थानीय मान्यता के अनुसार, इस कुंड में स्नान करने से त्वचा संबंधी रोगों से मुक्ति मिलती है।
बाबा निंबेश्वर नाथ को लेकर गहरी आस्था
बाबा निंबेश्वर नाथ मंदिर को लेकर स्थानीय लोगों में गहरी आस्था है।मान्यता है कि यहां स्थापित शिवलिंग स्वयंभू है और सच्चे मन से बाबा की पूजा करने पर भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।इसी आस्था के चलते सावन के महीने में दूर-दूर से श्रद्धालु यहां जलाभिषेक करने पहुंचते हैं।
चार साल से जारी है दंडवत यात्रा
लेकिन इन सैकड़ों युवाओं की भक्ति का अंदाज सबसे अलग है।पिछले चार साल से लगातार… हर सावन… यही दंडवत यात्रा, यही संकल्प और यही मंजिल।तीन किलोमीटर का रास्ता जरूर है, लेकिन आस्था की दूरी जैसे शून्य है।पचदेवरी के ये युवा अपने हर दंडवत के साथ मानो यही संदेश देते हैं महादेव तक पहुंचने का रास्ता कठिन हो सकता है, लेकिन अगर विश्वास अटूट हो, तो मंजिल कभी दूर नहीं होती।
अंकित श्रीवास्तव की रिपोर्ट