मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बार फिर सादगी और संसाधनों के संतुलित उपयोग का संदेश देते हुए अलग उदाहरण पेश किया है। मुख्यमंत्री इंदौर से उज्जैन तक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ एक ही बस में सफर करते नजर आए। इस दौरान उनका काफिला भी बेहद सीमित रखा गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सादगी, सुशासन और ईंधन बचत को लेकर दिए गए संदेश को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सामूहिक यात्रा को प्राथमिकता दी। बस यात्रा के दौरान उनके साथ कई जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। सुरक्षा और आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए केवल तीन अन्य वाहन काफिले में शामिल थे।
मुख्यमंत्री की इस पहल को प्रशासनिक खर्चों में कटौती, ईंधन संरक्षण और नई कार्यसंस्कृति विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आमतौर पर वीआईपी मूवमेंट के दौरान बड़े काफिले देखने को मिलते हैं, लेकिन मुख्यमंत्री का बस में सफर करना लोगों और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना रहा।

यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ “जल गंगा संवर्धन अभियान”, विकास कार्यों और विभिन्न जनहित योजनाओं को लेकर चर्चा भी की। सरकार का कहना है कि यह पहल सरकारी संसाधनों के बेहतर उपयोग और अनावश्यक खर्चों को कम करने के उद्देश्य से की गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री की यह यात्रा जनता के बीच सकारात्मक संदेश देने के साथ-साथ प्रशासनिक तंत्र को भी सादगीपूर्ण कार्यशैली अपनाने की प्रेरणा देती है।