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प्रस्तावित कल्याण डैम के विरोध में किसानों का प्रदर्शन, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

बुरहानपुर के खापरखेड़ा और इच्छापुर के बीच प्रस्तावित कल्याण डैम का किसानों और ग्रामीणों ने विरोध किया। उनका कहना है कि परियोजना से 80 से 100 एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि जलमग्न होगी और 100 से अधिक किसान परिवार प्रभावित होंगे। किसानों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर परियोजना निरस्त करने की मांग की।

By: BS Yadav 
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प्रस्तावित कल्याण डैम के विरोध में किसानों का प्रदर्शन, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

बुरहानपुर: जिले के ग्राम खापरखेड़ा और इच्छापुर के बीच प्रस्तावित कल्याण (हैसे) डैम के विरोध में किसानों और ग्रामीणों ने जनसुनवाई के दौरान कलेक्टर को सामूहिक आवेदन सौंपकर परियोजना की स्वीकृति निरस्त करने की मांग की।

किसानों का कहना है कि प्रस्तावित डैम के निर्माण से उनकी वर्षों की मेहनत से तैयार उपजाऊ कृषि भूमि जलमग्न हो जाएगी, जिससे सैकड़ों परिवारों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका है।

आवेदन में ग्रामीणों ने बताया कि प्रस्तावित डैम स्थल से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर पहले से मोरसिया डैम तथा लगभग आधा किलोमीटर के दायरे में नागोनी और देवहरी डैम मौजूद हैं। उनका कहना है कि इन जलाशयों में वर्षा जल का पर्याप्त संग्रहण होता है और क्षेत्र की सिंचाई तथा जल संरक्षण की आवश्यकताएं पहले से पूरी हो रही हैं। ऐसे में एक और डैम की आवश्यकता नहीं है।

ग्रामीणों के अनुसार प्रस्तावित परियोजना से लगभग 80 से 100 एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि जलमग्न हो सकती है। उनका कहना है कि इससे खेती पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और कई किसानों की आय का प्रमुख स्रोत समाप्त हो जाएगा, क्योंकि अधिकांश परिवार पूरी तरह कृषि पर निर्भर हैं।

आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया कि डैम निर्माण से 100 से अधिक किसान परिवार सीधे प्रभावित हो सकते हैं। किसानों ने आशंका जताई कि इससे कृषि, सिंचाई व्यवस्था और ग्रामीणों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ेगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जिस परियोजना की आवश्यकता नहीं है, उस पर सरकारी धन खर्च करना उचित नहीं होगा।

किसानों ने प्रशासन से मांग की कि प्रस्तावित कल्याण डैम की स्वीकृति तत्काल निरस्त की जाए, उनकी भूमि का अधिग्रहण न किया जाए तथा उनकी सहमति के बिना किसी भी प्रकार की निर्माण प्रक्रिया शुरू न की जाए। उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

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