मध्यप्रदेश के सीहोर शहर में स्वच्छता व्यवस्था को लेकर नया विवाद सामने आया है। शहर के वार्ड नंबर 19 से सामने आई तस्वीरों और वीडियो ने नगर पालिका परिषद की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पहली बारिश के बाद क्षेत्र में सड़क पर कीचड़, गंदगी और जलभराव की स्थिति बनने पर स्थानीय नागरिक स्वयं सफाई कार्य करते नजर आए।
वार्डवासियों का कहना है कि बारिश के बाद सड़कों की हालत खराब हो गई थी और सफाई व्यवस्था समय पर नहीं होने के कारण उन्हें खुद आगे आकर सड़क और नालियों की सफाई करनी पड़ी। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधियों और नगर पालिका से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला, जिसके चलते उन्हें अपनी समस्या का समाधान स्वयं करना पड़ा।

इसी बीच नगर पालिका परिषद से जुड़ी कुछ तस्वीरें और वीडियो भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं। इनमें नगर पालिका के कर्मचारी और अधिकारी विभिन्न स्थानों पर पौधे और गमले रखते हुए दिखाई दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर इन तस्वीरों को लेकर यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या स्वच्छता और सौंदर्यीकरण के कार्य वास्तविक रूप से हो रहे हैं या केवल प्रचार-प्रसार तक सीमित हैं।
नागरिकों का कहना है कि शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए केवल फोटो या अभियान पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि जमीनी स्तर पर नियमित सफाई, जल निकासी और बुनियादी सुविधाओं पर भी ध्यान देना आवश्यक है। लोगों का मानना है कि यदि पहली बारिश में ही सड़कें कीचड़ और जलभराव से प्रभावित हो जाती हैं, तो संबंधित विभागों को अपनी व्यवस्थाओं की समीक्षा करनी चाहिए।
हालांकि नगर पालिका की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन यह मुद्दा शहर में चर्चा का केंद्र बन गया है। स्वच्छ भारत मिशन और नगर निकायों की कार्यप्रणाली को लेकर नागरिकों के बीच जवाबदेही की मांग भी बढ़ रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर को स्वच्छता रैंकिंग में बेहतर स्थान दिलाने के लिए केवल कागजी दावों के बजाय वास्तविक और सतत प्रयास जरूरी हैं। अब लोगों की निगाहें नगर पालिका परिषद की आगामी कार्रवाई और सफाई व्यवस्था में होने वाले सुधारों पर टिकी हैं।