भोपाल: नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक मामलों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की घोषणा के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। इस मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के फैसले का स्वागत करने के साथ ही सवाल उठाया है कि जब पेपर लीक की घटनाएं लंबे समय से सामने आ रही थीं, तब फास्ट ट्रैक कोर्ट का फैसला पहले क्यों नहीं लिया गया। पार्टी का कहना है कि सरकार ने इस दिशा में कदम उठाने में काफी देर कर दी।
वहीं भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए पलटवार किया है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता योगेश गुप्ता ने कहा कि कांग्रेस के नेता संसद में सार्थक चर्चा से बचते हैं और सदन के बाहर केवल राजनीतिक बयानबाजी करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के घटनाक्रम के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने राहुल गांधी, अखिलेश यादव और प्रियंका गांधी वाड्रा से संसद में आकर चर्चा करने और समाधान निकालने की अपील की थी, लेकिन विपक्ष ने सहयोग नहीं किया।
योगेश गुप्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं वीडियो संदेश जारी कर युवाओं को भरोसा दिलाया है कि उनकी मेहनत और भविष्य के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि युवाओं के हित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं और इसी उद्देश्य से पेपर लीक मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का फैसला लिया गया है।
भाजपा का दावा है कि इस व्यवस्था से पेपर लीक के मामलों में दोषियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई होगी और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता एवं युवाओं का विश्वास मजबूत होगा।हालांकि कांग्रेस का कहना है कि सरकार को केवल घोषणाएं करने के बजाय यह भी बताना चाहिए कि अब तक पेपर लीक के मामलों में कितने दोषियों को सजा मिली और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस व्यवस्था की जाएगी।
पेपर लीक का मुद्दा देशभर के लाखों प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों से जुड़ा है। ऐसे में फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। अब देखना होगा कि यह फैसला जमीन पर कितनी तेजी से लागू होता है और इससे युवाओं को कितना भरोसा मिल पाता है।