पन्ना, मध्य प्रदेश। पन्ना के मझगांय बांध में जलस्तर बढ़ने के साथ डूब क्षेत्र में आने वाले ग्रामीणों की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बांध का पानी बढ़ने से उनके घर और भविष्य संकट में हैं, लेकिन विस्थापन और लंबित मुआवजे से जुड़े मामलों का अब तक समाधान नहीं हुआ है। इसी मुद्दे को लेकर जय किसान संगठन के बैनर तले सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर के नेतृत्व में ‘चिता आंदोलन’ दोबारा शुरू किया गया है। आंदोलनकारी विस्थापन, मुआवजे और पुनर्वास से जुड़ी मांगों को लेकर प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
मझगांय बांध में जलस्तर बढ़ने के साथ डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों के ग्रामीणों के सामने अपने घर और जमीन को लेकर चिंता बढ़ गई है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि प्रभावित परिवारों के विस्थापन की प्रक्रिया पूरी नहीं होने और मुआवजे के मामले लंबित रहने के कारण उन्हें अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते पुनर्वास और मुआवजे की व्यवस्था नहीं की गई तो उनके सामने गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
ग्रामीणों ने अपनी मांगों को प्रशासन तक पहुंचाने के लिए जय किसान संगठन के बैनर तले ‘चिता आंदोलन’ शुरू किया है। सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। आंदोलन के माध्यम से प्रभावित परिवार विस्थापन की प्रक्रिया में पारदर्शिता, लंबित मुआवजे का जल्द भुगतान और पुनर्वास की ठोस व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।
आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया है कि आंदोलन को कमजोर करने के उद्देश्य से प्रभावित वनहरी के टपरियन गांव की बिजली काट दी गई। ग्रामीणों के मुताबिक बिजली आपूर्ति बाधित होने से पहले से परेशान परिवारों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। हालांकि, बिजली कटौती को लेकर लगाए गए इन आरोपों पर प्रशासन या संबंधित विभाग का पक्ष सामने आना बाकी है।
सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर का कहना है कि यह आंदोलन केवल घर और जमीन बचाने तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक प्रभावित परिवारों के अधिकार, सम्मान और न्याय की लड़ाई भी इसके केंद्र में है। उन्होंने ग्रामीणों की मांगों को जायज बताते हुए पारदर्शी सर्वे, समयबद्ध पुनर्वास और मुआवजे से संबंधित कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की है।

आंदोलनकारी ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में डूब क्षेत्र का पारदर्शी सर्वे, प्रभावित परिवारों का उचित पुनर्वास और लंबित मुआवजे का जल्द निपटारा शामिल है। ग्रामीणों ने मुआवजा वितरण में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की जांच कराने की भी मांग उठाई है। उनका कहना है कि प्रभावित परिवारों को उनके अधिकारों के अनुसार राहत मिलनी चाहिए और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।
ग्रामीणों के आंदोलन को जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से भी समर्थन मिलने की बात सामने आई है। कांग्रेस नेताओं ने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन पर ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से लेने की मांग करते हुए आंदोलनकारियों की मांगों को उचित बताया। कांग्रेस नेताओं ने विस्थापन और मुआवजे से जुड़े मामलों में जल्द समाधान की मांग की है।
जय किसान संगठन की नेताओं दिव्या अहिरवार और हिसाबी राजपूत ने चेतावनी दी है कि यदि ग्रामीणों की मांगों पर जल्द ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। संगठन की ओर से कहा गया है कि प्रभावित परिवारों की समस्याओं का समाधान नहीं होने की स्थिति में आंदोलन का दायरा बढ़ाया जा सकता है।
मझगांय बांध के बढ़ते जलस्तर के बीच ग्रामीणों का आंदोलन एक बार फिर चर्चा में है। एक तरफ डूब क्षेत्र में पानी बढ़ने से प्रभावित परिवारों की चिंता बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर विस्थापन और मुआवजे को लेकर प्रशासन से कार्रवाई की मांग की जा रही है। अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। प्रभावित परिवार चाहते हैं कि सर्वे, पुनर्वास और मुआवजे से जुड़े मामलों का जल्द और पारदर्शी तरीके से समाधान किया जाए।