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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी कूटनीति: वैश्विक मंच पर भारत का बढ़ता प्रभाव

नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और कूटनीति का दबदबा देखने को मिला। आतंकवाद, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, और बहुपक्षीय सुधारों पर पीएम मोदी के मजबूत संदेश के साथ-साथ शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन जैसे नेताओं के साथ हुई द्विपक्षीय बैठकों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भारत की स्थिति को और अधिक सुदृढ़ कर दिया है।

By: Nivedita 
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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी कूटनीति: वैश्विक मंच पर भारत का बढ़ता प्रभाव

नई दिल्ली के प्रतिष्ठित ‘भारत मंडपम’ में आयोजित 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन ने वैश्विक राजनीति और अर्थशास्त्र के गलियारों में एक नया इतिहास रच दिया है। भारत की अध्यक्षता में हो रहे इस दो दिवसीय महासम्मेलन में दुनिया भर के दिग्गज नेताओं का जमावड़ा लगा, जहां वैश्विक स्थिरता, बहुपक्षीय सुधार और आपसी सहयोग को मजबूत करने के लिए व्यापक चर्चाएं की गईं। इस आयोजन के केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक दूरदर्शिता और उनके द्वारा दिए गए सशक्त संदेश रहे, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय पटल पर एक बार फिर भारत के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित किया है।

वैश्विक मंच पर पीएम मोदी का मजबूत और बेबाक संदेश

सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में दुनिया के सामने उन गंभीर चुनौतियों को रखा, जिनसे आज पूरा विश्व जूझ रहा है। आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को दोहराते हुए उन्होंने वैश्विक सुरक्षा के लिए एकजुट होने का आह्वान किया। इसके अलावा, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत करने, ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी असमानता को पाटने जैसे अहम मुद्दों पर पीएम मोदी के विचारों को सदस्य देशों ने सराहा। उनका यह स्पष्ट संदेश था कि वैश्विक विकास का पहिया तभी आगे बढ़ सकता है जब विकासशील और उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं की आवाज को प्रमुखता से सुना जाए।

 

कूटनीतिक कड़ियां और द्विपक्षीय बैठकों के परिणाम

इस शिखर सम्मेलन का सबसे बड़ा आकर्षण विभिन्न देशों के शीर्ष नेताओं के बीच हुई द्विपक्षीय बैठकें रहीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सहित कई प्रमुख राष्ट्राध्यक्षों के साथ आमने-सामने की बैठकें कीं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा को कूटनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है, जिससे द्विपक्षीय संबंधों में जमी बर्फ पिघलने और आपसी व्यापारिक व क्षेत्रीय स्थिरता को नया आयाम मिलने की उम्मीद है। इन वार्ताओं के जरिए भारत ने यह साबित कर दिया है कि वह क्षेत्रीय शांति और कूटनीतिक संतुलन साधने में पूरी तरह सक्षम है।

‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ और भविष्य की रूपरेखा

शिखर सम्मेलन के समापन पर जारी ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ (New Delhi Declaration) ने आगामी वर्षों के लिए ब्रिक्स समूह की दिशा और दशा तय कर दी है। घोषणापत्र में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC), विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) जैसे वैश्विक संस्थानों में तत्काल सुधार की मांग दोहराई गई है, ताकि वे समकालीन दुनिया की वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित कर सकें। इसके साथ ही, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने, डिजिटल इकोनॉमी और सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDGs) को हासिल करने के लिए साझा रोडमैप तैयार किया गया है। यह शिखर सम्मेलन इस बात का गवाह बना है कि कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज वैश्विक दक्षिण (Global South) की मजबूत आवाज बन चुका है और दुनिया की महाशक्तियों के बीच संतुलन बनाते हुए अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रख रहा है।

 

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