नई दिल्ली। सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक भवन हादसे के बाद दिल्ली में भवन सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। घटना पर दुख जताते हुए इंद्रप्रस्थ पुनर्जागरण न्यास ने मृतकों को श्रद्धांजलि दी और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। न्यास ने हादसे की उच्चस्तरीय जांच के साथ दिल्ली के सार्वजनिक उपयोग वाले भवनों की अनिवार्य स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने की मांग की है।
हादसे के बाद पांच MCD अधिकारियों पर कार्रवाई
सत्य निकेतन भवन हादसे के मामले में दिल्ली सरकार के निर्देश पर MCD ने पांच अधिकारियों को निलंबित किया है। कार्रवाई की जद में साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर रणवीर सिंह, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ललित कुमार गोयल, असिस्टेंट इंजीनियर सुनील चौहान और जूनियर इंजीनियर आशीष कुमार शामिल हैं। इस कार्रवाई के बाद भवनों की सुरक्षा जांच और निगरानी व्यवस्था को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है।
सुरेन्द्र कुमार गुप्ता ने उठाए भवन सुरक्षा पर सवाल
इंद्रप्रस्थ पुनर्जागरण न्यास के अध्यक्ष सुरेन्द्र कुमार गुप्ता ने घटना को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि इसे केवल एक भवन दुर्घटना के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, हादसा भवन निर्माण मानकों, नियमित निरीक्षण और नागरिक सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कई सवाल सामने लाता है। सुरेन्द्र कुमार गुप्ता ने कहा कि यदि भवनों की समय-समय पर जांच, निर्माण मानकों का पालन और सुरक्षा परीक्षण प्रभावी तरीके से सुनिश्चित किया जाए, तो भविष्य में इस तरह की घटनाओं के खतरे को कम किया जा सकता है। उन्होंने नागरिकों की सुरक्षा को प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी बताया।
इंद्रप्रस्थ पुनर्जागरण न्यास ने जताया दुख
इंद्रप्रस्थ पुनर्जागरण न्यास ने सत्य निकेतन हादसे पर गहरा दुख जताते हुए मृतकों को श्रद्धांजलि दी और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। न्यास का कहना है कि भवनों की समय-समय पर जांच और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए तो भविष्य में इस तरह की घटनाओं के खतरे को कम किया जा सकता है।
उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग
न्यास ने उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र भेजकर मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। संगठन ने कहा है कि जांच के दौरान यदि किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही पीड़ितों को जल्द न्याय दिलाने के लिए विशेष न्यायिक व्यवस्था पर विचार करने की मांग भी की गई है।
इंद्रप्रस्थ पुनर्जागरण न्यास ने दिल्ली में आम लोगों के इस्तेमाल वाले भवनों की अनिवार्य स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने की मांग की है। संगठन के अनुसार, पीजी, छात्रावास, कोचिंग संस्थान, स्कूल, अस्पताल, व्यावसायिक परिसरों और बहुमंजिला किराये की इमारतों को विशेष रूप से सुरक्षा जांच के दायरे में लाया जाना चाहिए। न्यास ने कहा कि जांच में असुरक्षित पाए जाने वाले भवनों और निर्माण मानकों का उल्लंघन करने वाली इमारतों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए।
न्यास ने भवन सुरक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल निरीक्षण और पंजीकरण प्रणाली लागू करने का सुझाव दिया है। संगठन का मानना है कि डिजिटल व्यवस्था के जरिए भवनों के निरीक्षण, सुरक्षा प्रमाणन और संबंधित रिकॉर्ड की निगरानी बेहतर तरीके से की जा सकती है।
सुरेन्द्र कुमार गुप्ता ने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा किसी भी जिम्मेदार प्रशासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। दिल्ली को सुरक्षित और जवाबदेह शहर बनाने के लिए प्रशासन के साथ सामाजिक संगठनों और नागरिकों को भी मिलकर काम करना होगा। इंद्रप्रस्थ पुनर्जागरण न्यास ने कहा कि वह हादसे से प्रभावित परिवारों के साथ खड़ा है और भवन सुरक्षा को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए अभियान चलाएगा।