नई दिल्ली। दिल्ली के सत्य निकेतन मार्केट क्षेत्र में रविवार दोपहर एक पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। इमारत में दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों के रहने की बात सामने आई है और कई लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई गई।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक हादसे में अब तक तीन लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। वहीं राहत एवं बचाव अभियान के दौरान सात लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जिन्हें उपचार के लिए एम्स ट्रॉमा सेंटर भेजा गया। हादसे की सूचना रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे मिली। इसके बाद दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं और मलबा हटाने के साथ फंसे लोगों की तलाश शुरू की।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी घटनास्थल पर पहुंचीं और राहत कार्यों का जायजा लिया। मुख्यमंत्री के अनुसार, इमारत के बेसमेंट में खुदाई का काम चल रहा था। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक खुदाई के दौरान पिलर प्रभावित हुआ, जिसके बाद पूरी इमारत ढह गई। हालांकि हादसे की वास्तविक वजह और निर्माण संबंधी अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है।
सत्य निकेतन दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों के बीच रहने के लिए लोकप्रिय इलाका है। यहां बड़ी संख्या में छात्र किराए के कमरों और हॉस्टल जैसी सुविधाओं वाली बहुमंजिला इमारतों में रहते हैं। हादसे के बाद आसपास रहने वाले छात्रों में डर का माहौल है। कई छात्रों ने इमारतों की सुरक्षा और निर्माण गुणवत्ता को लेकर चिंता जाहिर की है। छात्रों का कहना है कि यदि ऐसी घटनाएं दोबारा हुईं तो उनकी सुरक्षा गंभीर खतरे में पड़ सकती है। कुछ छात्रों ने बताया कि हादसे के बाद उनके माता-पिता उन्हें वापस घर बुलाने की बात कह रहे हैं।
सत्य निकेतन में हुए हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कई नेताओं ने दुख व्यक्त किया है। नेताओं ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
हादसे के बाद प्रशासन और बचाव एजेंसियां मलबे में फंसे संभावित लोगों की तलाश में जुटी रहीं। घटना ने राजधानी में बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा, निर्माण मानकों और बेसमेंट में होने वाले निर्माण कार्यों की निगरानी को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।