भोपाल। मध्य प्रदेश के सागर में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस मामले को लेकर मोहन यादव सरकार पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अवैध शराब के कारोबार, सप्लाई नेटवर्क और प्रशासनिक निगरानी के साथ कथित राजनीतिक संरक्षण की भी जांच कराने की मांग की है। सिंघार ने मृतकों के परिजनों के लिए सरकार की ओर से घोषित आर्थिक सहायता को अपर्याप्त बताते हुए प्रत्येक परिवार को 25 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की है।
उमंग सिंघार ने 6 सितंबर को सागर जिले के प्रभावित गांवों का दौरा किया और जहरीली शराब त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि कई परिवारों ने अपने युवा सदस्यों, पिता या परिवार के मुख्य कमाऊ सदस्य को खो दिया है। नेता प्रतिपक्ष ने सरकार से मांग की कि पीड़ित परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता के साथ पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए।
सिंघार ने शराब में मेथेनॉल के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि मेथेनॉल एक जहरीला औद्योगिक रसायन है और मानव सेवन के लिए नहीं है। उनका कहना है कि जांच केवल अवैध शराब बेचने वाले आरोपियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जांच एजेंसियों को यह भी पता लगाना चाहिए कि कथित तौर पर मेथेनॉल कहां से आया, इसे शराब में किस स्तर पर मिलाया गया और इसके पीछे पूरा नेटवर्क कौन संचालित कर रहा था।
उमंग सिंघार ने मामले में सामने आए ‘Sagar Gold’ और ‘Bambaiya Whisky’ नामों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि ‘Sagar Gold’ की बोतल पर सागर जिले की एक डिस्टिलरी का पता दर्ज है, जबकि पुलिस की ओर से शराब की सप्लाई उत्तर प्रदेश के ललितपुर से जुड़े होने की बात सामने आने का उल्लेख किया गया है। सिंघार ने सवाल किया कि यदि शराब दूसरे राज्य से मध्य प्रदेश में पहुंची, तो सीमा पर पुलिस और आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था किस तरह काम कर रही थी।
नेता प्रतिपक्ष ने अवैध शराब कारोबार में कथित राजनीतिक संरक्षण की जांच की भी मांग की। उन्होंने कॉरपोरेट रिकॉर्ड में दर्ज एक डिस्टिलरी के निदेशकों के नामों का हवाला देते हुए कथित राजनीतिक संबंधों की जांच की मांग उठाई।इसके अलावा उन्होंने स्थानीय स्तर पर पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह से जुड़े लोगों पर लगाए जा रहे अवैध शराब कारोबार के आरोपों की भी जांच कराने की बात कही। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच का विषय है।
सिंघार ने आरोप लगाया कि ब्रांडेड शराब की बोतलों में नकली शराब भरकर बाजार में बेचने का नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। उन्होंने कहा कि कम कीमत पर उपलब्ध होने के कारण ऐसी शराब गरीब और मजदूर वर्ग के बीच पहुंच सकती है। उन्होंने बॉटलिंग से लेकर लेबलिंग, परिवहन और वितरण तक पूरे नेटवर्क की जांच की मांग की है, ताकि अवैध कारोबार की वास्तविक कड़ियों का पता लगाया जा सके।
जहरीली शराब से हुई मौतों को लेकर मुआवजे के मुद्दे पर भी सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद सामने आए हैं। सरकार की ओर से मृतकों के परिवारों को चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है। वहीं उमंग सिंघार ने प्रत्येक मृतक के परिवार को कम से कम 25 लाख रुपये देने की मांग की है। उनका कहना है कि मृतकों में ऐसे लोग भी शामिल थे जो अपने परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य थे।
मुख्यमंत्री मोहन यादव के निवेश से जुड़े दुबई दौरे को लेकर भी उमंग सिंघार ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने प्रदेश में जहरीली कफ सिरप, जहरीले पानी और अब जहरीली शराब से जुड़ी घटनाओं का हवाला देते हुए सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए। सिंघार ने कहा कि निवेश आकर्षित करने के साथ आम नागरिकों की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करना भी सरकार की जिम्मेदारी है।
उमंग सिंघार ने गुजरात के भावनगर में हुई जहरीली शराब की घटना का उल्लेख करते हुए मध्य प्रदेश से जुड़े कथित आरोपियों और अवैध शराब नेटवर्क की जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि सागर मामले की जांच को केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि सप्लाई चेन की व्यापक पड़ताल होनी चाहिए।
सिंघार ने आबकारी विभाग के कथित आदेशों में बदलाव को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा। उनके मुताबिक, 6 सितंबर को ‘Sagar Gold’ की बिक्री रोकने, उपलब्ध स्टॉक को सील-जप्त करने और एफएसएल जांच के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद संशोधित आदेश में कथित तौर पर कहा गया कि ‘Sagar Gold’ नगण्य मात्रा में है और सामान्य जांच के अलावा अलग कार्रवाई की जरूरत नहीं है। इसी बदलाव को लेकर नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाया कि आखिर कुछ ही समय के भीतर परिस्थितियां ऐसी क्या बदलीं कि पहले सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए और बाद में अतिरिक्त कार्रवाई की आवश्यकता नहीं बताई गई।
जहरीली शराब के मुद्दे पर उमंग सिंघार ने भाजपा और आरएसएस पर भी राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रही है। सिंघार ने इंदौर के भागीरथपुरा, बालाघाट और छिंदवाड़ा की घटनाओं का जिक्र करते हुए सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की।
सागर की जहरीली शराब त्रासदी अब मध्य प्रदेश में राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन चुकी है। विपक्ष जहां अवैध शराब के पूरे नेटवर्क, सप्लाई चेन और कथित राजनीतिक संरक्षण की जांच की मांग कर रहा है, वहीं मामले में सरकारी कार्रवाई और जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जांच एजेंसियां शराब की सप्लाई से लेकर उसकी बिक्री तक की पूरी कड़ी को किस तरह सामने लाती हैं और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत साबित होती है तो जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होती है।