मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले की वरला पुलिस ने अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। ग्राम बोरपड़ावा के जंगलों में स्थित चार खेतों से पुलिस ने 10 क्विंटल 71 किलो गांजे की फसल बरामद की है। जब्त किए गए कुल 6,185 पौधों की अनुमानित अंतरराष्ट्रीय बाजार कीमत 50 से 52 लाख रुपए आंकी गई है। इस पूरी कार्रवाई को बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम देने के लिए ड्रोन और 75 पुलिसकर्मियों की भारी फौज का इस्तेमाल किया गया।
पुलिस मुख्यालय भोपाल के निर्देश तथा आईजी ग्रामीण जोन इंदौर और डीआईजी निमाड़ रेंज खरगोन के मार्गदर्शन में यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में बड़वानी एसपी पद्मविलोचन शुक्ल को 10 सितंबर को मुखबिर से सूचना मिली थी कि बोरपड़ावा के जंगलों में अवैध रूप से गांजे की खेती की जा रही है। सूचना मिलते ही एसपी ने तुरंत एक गुप्त एक्शन प्लान तैयार किया। जिला पुलिस मुख्यालय से 45 और सेंधवा अनुभाग से 30 जवानों समेत कुल 75 पुलिसकर्मियों का बल मैदान में उतारा गया। किसी भी तरह की जानकारी लीक न हो, इसके लिए पुलिसकर्मियों को पिकअप वाहनों में त्रिपाल से ढककर जंगल के भीतर ले जाया गया और ड्रोन कैमरों की मदद से खेतों की सटीक लोकेशन का पता लगाया गया।
जब पुलिस टीमों ने जंगलों की तलाशी ली, तो चार अलग-अलग खेतों में बड़े पैमाने पर गांजे के पौधे लहलहाते हुए मिले। पुलिस बल को देखकर तस्कर मौके से फरार होने में कामयाब हो गए। इसके बाद पुलिस की चार अलग-अलग टीमों ने चारों खेतों पर एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की धारा 8/20 के तहत कार्रवाई करते हुए कुल 6,185 पौधे जब्त किए। इन सभी पौधों का कुल वजन 10 क्विंटल 71 किलोग्राम पाया गया है।

जांच के दौरान यह बात सामने आई कि ये चारों खेत वन भूमि के अंतर्गत आते हैं, जो कि सिरवेल वन रेंज (जिला खरगोन) के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी और एसडीओपी ने खरगोन डीएफओ से संपर्क कर सिरवेल के रेंजर को मौके पर बुलाया। वन विभाग की टीम ने टोपोग्राफी और अक्षांश-देशांतर (Latitude-Longitude) के जरिए खेतों की पैमाइश कर उन्हें चिन्हित किया। वन विभाग के रिकॉर्ड के आधार पर अब इन जमीनों के पट्टा धारकों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसा गया है।
बड़वानी एसपी ने मीडिया को जानकारी दी कि फिलहाल चारों खेतों के पट्टा धारकों को नामजद आरोपी बनाया गया है, जिनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। पुलिस हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की जाएगी कि इस अवैध खेती के पीछे और कौन-कौन लोग शामिल हैं। यदि यह जमीनें किसी अन्य व्यक्ति को किराए या बटाई पर दी गई होंगी, तो उन्हें भी इस मामले में सह-आरोपी बनाया जाएगा। इस बड़ी और सफल कार्रवाई में थाना प्रभारी वरला निरीक्षक नारायण रावल, सेंधवा ग्रामीण थाना प्रभारी और पुलिस लाइन के अमले की विशेष और सराहनीय भूमिका रही है।