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‘विदा होती बेटियाँ’ के रचनाकार डॉ. ओम प्रकाश को ‘माटी महकी सम्मान-2026’

शक्तिनगर में आयोजित साहित्यिक समारोह में ‘विदा होती बेटियाँ’ के रचनाकार डॉ. ओम प्रकाश को हिंदी साहित्य में योगदान के लिए ‘माटी महकी सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया। स्वर्गीय डॉ. शालिग्राम शर्मा की जयंती पर आयोजित काव्य-संध्या में देशज संवेदनाओं, पारिवारिक रिश्तों और लोकभाषा से जुड़ी रचनाओं ने श्रोताओं को प्रभावित किया।

By: Nivedita 
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‘विदा होती बेटियाँ’ के रचनाकार डॉ. ओम प्रकाश को ‘माटी महकी सम्मान-2026’

शक्तिनगर, सोनभद्र:  हिंदी कविता के जरिए पारिवारिक रिश्तों, बेटियों, माता-पिता, प्रेम और मानवीय संवेदनाओं को अभिव्यक्ति देने वाले कवि डॉ. ओम प्रकाश को वर्ष 2026 का ‘माटी महकी सम्मान’ प्रदान किया गया। साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था सोन संगम की ओर से यह सम्मान हिंदी भाषा और साहित्य में उनके योगदान के लिए दिया गया।

डॉ. शालिग्राम शर्मा की जयंती पर हुआ आयोजन

सम्मान समारोह और काव्य-संध्या का आयोजन 9 सितंबर 2026 को विद्युत विहार आवासीय परिसर, शक्तिनगर में किया गया। कार्यक्रम का आयोजन अवधी एवं हिंदी के प्रसिद्ध कवि स्वर्गीय डॉ. शालिग्राम शर्मा की जयंती के अवसर पर हुआ। कार्यक्रम में विंध्यनगर डिपो के एआरएम नागेंद्र पांडेय मुख्य अतिथि रहे। सोनभद्र के चर्चित लोककवि जगदीश पंथी ने समारोह की अध्यक्षता की, जबकि अवधूत भगवान राम महाविद्यालय, अनपरा के प्राचार्य डॉ. अजय विक्रम विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

सम्मान को बताया अपनी माटी से जुड़ाव का अवसर

एनटीपीसी शक्तिनगर में उप महाप्रबंधक (मानव संसाधन-राजभाषा) के पद पर कार्यरत डॉ. ओम प्रकाश ने सम्मान प्राप्त करने के बाद स्वर्गीय डॉ. शालिग्राम शर्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि अपनी धरती और समाज से मिलने वाला सम्मान किसी भी रचनाकार को अपनी जड़ों के और करीब ले जाता है। उनके अनुसार साहित्य की भूमिका केवल घटनाओं और समय को शब्दों में दर्ज करना नहीं, बल्कि समाज में प्रेम, करुणा और संवेदनशीलता को बनाए रखना भी है।

कविता के जरिए रिश्तों की संवेदनाओं को किया प्रस्तुत

काव्य-संध्या में डॉ. ओम प्रकाश ने अपने चर्चित काव्य-संग्रह ‘विदा होती बेटियाँ’ की शीर्षक रचना सहित कई कविताओं का पाठ किया। उनकी कविताओं में बेटी की विदाई, पिता के सपने, मां का अकेलापन, प्रेम और बदलते मानवीय रिश्तों की भावनाएं प्रमुखता से उभरीं। उनकी रचनाओं ने कार्यक्रम में मौजूद साहित्यप्रेमियों को भावुक कर दिया। खासतौर पर मानवीय संवेदनाओं और प्रेम को केंद्र में रखने वाली कविताओं को श्रोताओं की खूब सराहना मिली।

 

लोकभाषा और खड़ी बोली का दिखा संगम

कार्यक्रम में लोककवि जगदीश पंथी ने अपनी लोकधर्मी रचनाओं के माध्यम से ग्रामीण जीवन और मिट्टी की खुशबू को शब्द दिए। इसके अलावा माहिर मिर्जापुरी, डॉ. योगेंद्र मिश्र, डॉ. अजय विक्रम, डॉ. देवेंद्र श्रीवास्तव, सचिन मिश्र, रमाकांत पांडेय, बहर बनारसी और विजयलक्ष्मी पटेल सहित कई रचनाकारों ने काव्य पाठ किया। खड़ी बोली के साथ लोकभाषाओं की रचनाओं ने साहित्यिक आयोजन को देर रात तक जीवंत बनाए रखा।

पहले भी कई साहित्यकारों को मिल चुका है सम्मान

‘माटी महकी सम्मान’ स्वर्गीय डॉ. शालिग्राम शर्मा की स्मृति में प्रदान किया जाता है। इससे पहले हरिहर प्रसाद विश्वकर्मा, जगदीश पंथी, माहिर मिर्जापुरी, अजय चतुर्वेदी कक्का, गोपाल तिवारी और शिवशंकर मिश्र ‘सरस’ को यह सम्मान दिया जा चुका है।

साहित्यप्रेमियों ने बढ़ाया आयोजन का गौरव

समारोह में सोन संगम के कार्यकारी अध्यक्ष विजय दुबे समेत क्षेत्र के अनेक साहित्यकार, सामाजिक कार्यकर्ता, गणमान्य नागरिक और साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. शालिग्राम शर्मा के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर हुई। सरस्वती वंदना के बाद अतिथियों का स्वागत किया गया और डॉ. शर्मा की प्रतिनिधि रचनाओं का भी पाठ हुआ। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मानिक चंद पांडेय ने किया और अंत में उन्होंने सभी अतिथियों एवं उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।

 

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