गोरखपुर के लाल ने एक बार फिर किकबॉक्सिंग रिंग में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय के छात्र और अंतरराष्ट्रीय किकबॉक्सर सनी सिंह ने राष्ट्रीय किकबॉक्सिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक अपने नाम किया है। खास बात ये है कि सनी लगातार चौथे साल नेशनल मेडलिस्ट बने हैं। अब उनका अगला लक्ष्य दिसंबर में कंबोडिया में होने वाली एशियन किकबॉक्सिंग चैंपियनशिप है, जहां वो भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।रिंग में उतरते ही सनी सिंह का लक्ष्य बिल्कुल साफ था, दमदार प्रदर्शन के साथ उत्तर प्रदेश के लिए पदक हासिल करना। राष्ट्रीय चैंपियनशिप में सनी का सामना पंजाब, केरल, हिमाचल प्रदेश और पश्चिम बंगाल के मजबूत खिलाड़ियों से हुआ। हर मुकाबले में उन्होंने आक्रामक खेल दिखाया और शानदार पंच-किक के दम पर सेमीफाइनल तक का सफर तय किया।
चार साल चार बार नेशनल पोडियम पर सनी
सनी की इस उपलब्धि की खास बात उनकी निरंतरता है। साल 2023 से 2026 तक लगातार चार वर्षों से वह राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत रहे हैं। लगातार बेहतर प्रदर्शन ने सनी को किकबॉक्सिंग के राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया है। अब सनी की नजर देश के बाहर होने वाले बड़े मुकाबले पर है। दिसंबर में कंबोडिया में एशियन किकबॉक्सिंग चैंपियनशिप होने जा रही है। इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर सनी भारतीय तिरंगे के साथ रिंग में उतरेंगे। उनका लक्ष्य एशियन चैंपियनशिप में भारत के लिए पदक जीतना है।

DDU के छात्र सनी का ग्लोबल जलवा, वर्ल्ड कप में पांचवीं रैंक
सनी डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय में एमए समाजशास्त्र के छात्र हैं। पढ़ाई के साथ वह वाटर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स स्थित सीसा स्पोर्ट्स एकेडमी में नियमित रूप से कड़ा अभ्यास करते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनका प्रदर्शन प्रभावशाली रहा है। 2024 WAKO वर्ल्ड कप में सनी ने ग्लोबल स्तर पर पांचवीं रैंक हासिल की, जबकि 2025 वर्ल्ड चैंपियनशिप में वह नौवीं वैश्विक रैंक पर रहे।
रिंग के चैंपियन बेटियों को भी सिखाया आत्मरक्षा का हुनर
सनी सिंह की पहचान सिर्फ किकबॉक्सिंग रिंग में मेडल जीतने वाले खिलाड़ी की नहीं है, बल्कि वो बेटियों को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम का भी हिस्सा हैं। सनी अब तक 5000 से ज्यादा छात्राओं को नि:शुल्क आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दे चुके हैं। ट्रेनिंग के दौरान छात्राओं को मुश्किल परिस्थितियों में खुद का बचाव करने के तरीके, आत्मविश्वास और सतर्कता के गुर सिखाए जाते हैं।
सनी का मानना है कि खेल सिर्फ मेडल जीतने का जरिया नहीं बल्कि समाज को मजबूत बनाने का माध्यम भी है। यही वजह है कि रिंग में अपने प्रतिद्वंद्वी को चुनौती देने वाला ये खिलाड़ी मैदान के बाहर बेटियों को अपनी सुरक्षा के लिए तैयार कर रहा है। उनकी ये पहल खेल उपलब्धियों के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल भी बन रही है।
नेशनल के बाद अब एशियन रिंग में सनी का दम, तिरंगे के लिए होगी जंग
गोरखपुर से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर लगातार चार साल अपनी पहचान बनाने वाले सनी सिंह अब अंतरराष्ट्रीय रिंग में बड़ा दांव लगाने को तैयार हैं। नेशनल चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने के बाद उनका अगला लक्ष्य दिसंबर में कंबोडिया में होने वाली एशियन किकबॉक्सिंग चैंपियनशिप है। यहां सनी भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए अपनी तकनीक, फिटनेस और अनुभव का पूरा दम दिखाएंगे। नजर सिर्फ मुकाबला जीतने पर नहीं, बल्कि एशियन पोडियम पर जगह बनाकर देश के लिए पदक हासिल करने पर है। गोरखपुर का ये खिलाड़ी अब उस मंच की तैयारी में जुटा है, जहां हर पंच और हर किक के साथ तिरंगे की उम्मीद भी जुड़ी होगी।
अंकित श्रीवास्तव की रिपोेर्ट