भोपाल। मध्यप्रदेश में नगरीय निकायों के उपचुनाव स्थगित किए जाने को लेकर सियासत तेज हो गई है। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने चुनाव स्थगित किए जाने पर भाजपा सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग पर तीखा हमला बोला है। पटवारी ने आरोप लगाया कि भाजपा को जनता के जनादेश का डर है, इसलिए नगरीय निकायों के उपचुनावों को स्थगित किया गया है।
पटवारी के मुताबिक, नगरपालिका, नगर निगम और नगर पंचायतों के उपचुनाव के लिए प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी, लेकिन अचानक इन्हें आगामी आदेश तक स्थगित कर दिया गया। वहीं जनपद पंचायत और जिला पंचायत के उपचुनाव पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहने की बात उन्होंने कही। इसी आधार पर कांग्रेस अध्यक्ष ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर दोहरे मापदंड का सवाल उठाया।
उन्होंने कहा कि नगरीय निकायों के चुनाव राजनीतिक दलों के चुनाव चिन्ह पर होते हैं। ऐसे में भाजपा को यह आशंका क्यों है कि चुनाव होने पर जनता उसे नकार सकती है? पटवारी ने सवाल किया कि यदि भाजपा को अपने जनसमर्थन पर भरोसा है तो चुनाव स्थगित करने की जरूरत क्यों पड़ी।

निर्वाचन आयोग से मांगा जवाब
पटवारी ने 7 सितंबर 2026 को राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी पत्र का हवाला देते हुए कहा कि नगरीय निकाय उपचुनाव आगामी आदेश तक स्थगित किए गए हैं। उन्होंने चुनाव स्थगित करने के पीछे बताए जा रहे कानून-व्यवस्था, अतिरिक्त सुरक्षा बल, बारिश, आपदा राहत कार्य और आगामी त्योहारों जैसे कारणों पर भी सवाल उठाया।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने पूछा कि यदि ये परिस्थितियां पहले से मौजूद थीं, तो चुनाव कार्यक्रम घोषित करने से पहले इनका आकलन क्यों नहीं किया गया। उन्होंने निर्वाचन आयोग से चुनाव स्थगित करने के वास्तविक कारणों को प्रदेश की जनता के सामने स्पष्ट करने की मांग की।पटवारी ने आरोप लगाया कि चुनाव लोकतंत्र की बुनियाद हैं और उन्हें राजनीतिक सुविधा के आधार पर रोका जाना संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि भाजपा की हार का डर चुनाव रोककर नहीं छिपाया जा सकता।
कांग्रेस ने उठाया लोकतांत्रिक प्रक्रिया का मुद्दा
पटवारी ने कहा कि चुनाव जनता का अधिकार है, किसी सरकार की सुविधा नहीं। उन्होंने निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग करते हुए कहा कि कांग्रेस लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता से कोई समझौता नहीं करेगी। हालांकि, चुनाव स्थगित किए जाने को लेकर भाजपा सरकार या राज्य निर्वाचन आयोग का विस्तृत पक्ष इस बयान में उपलब्ध नहीं है। ऐसे में अब इस मुद्दे पर आयोग और सरकार की ओर से स्पष्टीकरण का इंतजार है।