भोपाल। मध्य प्रदेश में जहरीली और अवैध शराब को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने प्रदेश सरकार और आबकारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि प्रदेश में शराब कारोबार के पीछे एक संगठित सिंडिकेट काम कर रहा है। पार्टी का दावा है कि इसी कथित नेटवर्क के चलते अवैध शराब के कारोबार पर प्रभावी तरीके से अंकुश नहीं लग पा रहा है।
कांग्रेस प्रवक्ता राहुल राज ने जहरीली शराब से हुई मौतों पर दुख जताते हुए शराब ठेकों की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि कुछ शराब ठेकेदार कथित तौर पर पहले ही आपस में तय कर लेते हैं कि कौन सा ठेका किसे मिलना है।
राहुल राज ने कहा कि जहरीली शराब से जिन लोगों की मौत हुई है, उनके परिवारों के प्रति कांग्रेस की संवेदनाएं हैं। उन्होंने दावा किया कि शराब ठेकों को लेकर पहले से मिलीभगत के संबंध में केंद्र सरकार की किसी एजेंसी की रिपोर्ट अखबारों में प्रकाशित हो चुकी है।कांग्रेस ने आबकारी नियमों में शामिल कथित 2 करोड़ रुपये के क्लॉज को लेकर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि इस तरह की शर्तों के कारण नए कारोबारियों के लिए शराब के कारोबार में प्रवेश करना मुश्किल हो जाता है।
कांग्रेस का यह भी दावा है कि यदि सिंडिकेट से बाहर का कोई कारोबारी टेंडर हासिल कर लेता है, तो कथित तौर पर उसे समय पर शराब की आपूर्ति नहीं की जाती। पार्टी के मुताबिक, ऐसी परिस्थितियों में संबंधित कारोबारी पर टेंडर सरेंडर करने का दबाव बनाया जा सकता है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने उज्जैन, इंदौर, सागर और मुरैना सहित प्रदेश के कई हिस्सों में अवैध और कथित जहरीली शराब के नेटवर्क के होने का आरोप लगाया। पार्टी ने सरकार से सवाल किया है कि कथित शराब सिंडिकेट के पीछे कौन लोग हैं और यदि अवैध शराब का नेटवर्क व्यापक है तो इसे रोकने के लिए जिम्मेदार तंत्र की ओर से क्या कार्रवाई की जा रही है।कांग्रेस के इन आरोपों के बाद अब सरकार और आबकारी विभाग के जवाब का इंतजार है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर में नहीं हुई है। सरकार या आबकारी विभाग का पक्ष सामने आने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।