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उज्जैन के सती गेट स्थित खड़े हनुमान मंदिर की शिफ्टिंग पर पेच, 3-4 प्रयास नाकाम; आस्था और सुरक्षा के बीच अटका मामला

उज्जैन के सती गेट स्थित प्रसिद्ध खड़े हनुमान मंदिर की शिफ्टिंग का मामला उलझता जा रहा है। सड़क चौड़ीकरण के लिए मंदिर को स्थानांतरित करने के 3-4 प्रयास अब तक सफल नहीं हो सके हैं।

By: BS Yadav 
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उज्जैन के सती गेट स्थित खड़े हनुमान मंदिर की शिफ्टिंग पर पेच, 3-4 प्रयास नाकाम; आस्था और सुरक्षा के बीच अटका मामला

उज्जैन। सती गेट स्थित प्रसिद्ध खड़े हनुमान मंदिर की शिफ्टिंग का मामला लगातार पेचीदा होता जा रहा है। सड़क चौड़ीकरण और विकास कार्यों के तहत मंदिर को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन प्रशासन और नगर निगम की टीम कई प्रयासों के बावजूद अब तक मूर्ति को सुरक्षित तरीके से शिफ्ट नहीं कर पाई है।बताया जा रहा है कि मूर्ति की शिफ्टिंग के लिए तीन से चार बार प्रयास किए जा चुके हैं, लेकिन हर बार प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुरातत्व विभाग की टीमें भी मौके पर पहुंचीं और मूर्ति को सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित करने की संभावनाओं का जायजा लिया। हालांकि, इन प्रयासों के बावजूद अभी तक सफलता नहीं मिली है।

आस्था और विकास के बीच सवाल

शिफ्टिंग का मामला अब केवल सड़क चौड़ीकरण या विकास कार्य तक सीमित नहीं रह गया है। स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए मूर्ति की सुरक्षा और धार्मिक आस्था सबसे बड़ा मुद्दा बन गई है।श्रद्धालुओं का दावा है कि मंदिर का इतिहास करीब 150 से 250 साल पुराना है और मंदिर से जुड़े परिवार की कई पीढ़ियां यहां पूजा और सेवा करती आ रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे विकास कार्यों के विरोध में नहीं हैं, लेकिन मूर्ति को किसी भी तरह की क्षति नहीं पहुंचनी चाहिए।स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि खुदाई और शिफ्टिंग की कोशिशों के दौरान मंदिर के हिस्से में दरारें दिखाई दी हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। श्रद्धालु प्रशासन से मूर्ति की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट आश्वासन और जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं।

श्रद्धालुओं की दो टूक

स्थानीय श्रद्धालु प्रवीन का कहना है कि उनका विरोध विकास या मंदिर की शिफ्टिंग से नहीं है। उनकी मांग केवल यह है कि मूर्ति पूरी तरह सुरक्षित रहे और किसी भी परिस्थिति में खंडित न हो।वहीं शेलू यादव का कहना है कि मंदिर से जुड़ी आस्था कई पीढ़ियों पुरानी है। यदि प्रशासन मूर्ति को स्थानांतरित करना चाहता है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी भी प्रशासन को लेनी चाहिए। उनका दावा है कि अभी तक उन्हें इस संबंध में लिखित जिम्मेदारी नहीं दी गई है।

प्रशासन के अगले कदम पर नजर

फिलहाल नगर निगम और प्रशासन की टीमें मंदिर की शिफ्टिंग को लेकर संभावनाएं तलाश रही हैं। पुरातत्व विभाग की टीमों की मौजूदगी के बावजूद मूर्ति को स्थानांतरित करने में सफलता नहीं मिली है।अब सवाल यह है कि सड़क चौड़ीकरण और विकास की जरूरत के साथ धार्मिक आस्था और मूर्ति की सुरक्षा के बीच संतुलन कैसे बनाया जाएगा। खड़े हनुमान मंदिर की शिफ्टिंग को लेकर स्थानीय श्रद्धालुओं की नजर अब प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई है।

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