भोपाल, 12 सितंबर 2026। ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इमाम के चीफ इमाम डॉ. उमेर अहमद इलियासी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत संवाद को विशेष महत्व देते हैं। उन्होंने डॉ. भागवत के व्यक्तित्व को विराट बताते हुए कहा कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश को समझने के लिए अलग-अलग सामाजिक परंपराओं और विचारों के बीच संवाद बेहद जरूरी है। डॉ. इलियासी शुक्रवार को भोपाल विधानसभा परिसर स्थित मानसरोवर सभागार में वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक कृष्णमोहन झा की पुस्तक ‘डॉ. मोहन भागवत संदेश’ के विमोचन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
डॉ. उमेर इलियासी ने कहा कि भारत की सामाजिक संरचना अनेक विचारों, संस्कृतियों और परंपराओं से मिलकर बनी है। ऐसे विविध समाज में संवाद आपसी समझ को बढ़ाने के साथ विश्वास और सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने का माध्यम भी बनता है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति के विचारों को समझने के लिए उन्हें अलग-अलग संदर्भों में देखना आवश्यक है। इसी दृष्टिकोण से डॉ. मोहन भागवत के विभिन्न विषयों पर दिए गए विचारों को एक पुस्तक में संकलित करना महत्वपूर्ण प्रयास है।

समारोह में पुस्तक का विमोचन मध्य प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा और आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. अशोक कुमार वार्ष्णेय ने किया। कार्यक्रम में महामंडलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि समेत विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। डॉ. इलियासी ने लेखक कृष्णमोहन झा के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि पुस्तक के माध्यम से डॉ. मोहन भागवत के विचारों को व्यापक संदर्भ में समझने का अवसर मिलता है। उनके मुताबिक, ऐसे प्रयास समाज में मौजूद कई तरह की गलतफहमियों को दूर करने में भी सहायक हो सकते हैं।
मुख्य वक्ता डॉ. अशोक कुमार वार्ष्णेय ने कहा कि सामान्य तौर पर पुस्तकें किसी एक विषय या व्यक्तित्व पर केंद्रित होती हैं, लेकिन ‘डॉ. मोहन भागवत संदेश’ में अलग-अलग विषयों पर उनके विचारों को एक साथ प्रस्तुत किया गया है।उन्होंने बताया कि पुस्तक में विचारों के संकलन के साथ उनके विश्लेषण और निष्कर्ष को भी जगह दी गई है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ युवाओं के साथ लगातार संवाद करता रहा है और समकालीन मुद्दों पर डॉ. मोहन भागवत के विचार युवाओं को समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी भूमिका समझने में मदद कर सकते हैं।

महामंडलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि ने कहा कि पुस्तक में राष्ट्रचिंतन, सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण से जुड़े डॉ. मोहन भागवत के विचारों को संकलित किया गया है। उन्होंने भारत की व्यापक सांस्कृतिक दृष्टि को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अखंड भारत की अवधारणा को संवाद और विचार-विमर्श के माध्यम से समझने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।

मध्य प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि कृष्णमोहन झा ने डॉ. मोहन भागवत के व्यापक विचारों को पुस्तक के रूप में संजोने का महत्वपूर्ण प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि डॉ. मोहन भागवत को केवल एक व्यक्ति के रूप में नहीं, बल्कि एक विचार के रूप में भी देखा जाता है और उनके विचारों को पाठकों तक पहुंचाने का यह प्रयास सराहनीय है।
लेखक कृष्णमोहन झा ने बताया कि डॉ. मोहन भागवत के विभिन्न भाषणों और वक्तव्यों को पढ़ने के बाद उनके विचारों को एक जगह संकलित करने का विचार आया। इसी उद्देश्य से ‘डॉ. मोहन भागवत संदेश’ पुस्तक तैयार की गई।उन्होंने बताया कि पुस्तक में राष्ट्रचिंतन, सामाजिक समरसता, राष्ट्र निर्माण, युवा, श्रम की प्रतिष्ठा, संगठन और समाज जैसे विषयों पर डॉ. मोहन भागवत के विचारों को शामिल किया गया है।
समारोह में उपस्थित अतिथियों और गणमान्य नागरिकों ने पुस्तक के प्रकाशन पर लेखक को शुभकामनाएं दीं। वक्ताओं ने कहा कि मौजूदा दौर में विभिन्न विचारों और सामाजिक वर्गों के बीच संवाद को मजबूत करना महत्वपूर्ण है। इसी दिशा में पुस्तक को एक उपयोगी प्रयास के रूप में रेखांकित किया गया।