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भोपाल मास्टर प्लान मामला: कांग्रेस का सरकार पर तीखा हमला, पीसी शर्मा बैठे 31 घंटे के उपवास पर

भोपाल में मास्टर प्लान लागू करने की मांग को लेकर कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पूर्व मंत्री और विधायक पीसी शर्मा रोशनपुरा चौराहे पर 31 घंटे के उपवास पर बैठे हैं, वहीं विधायक जयवर्धन सिंह ने सरकार पर अवैध कॉलोनियों को बढ़ावा देने और व्यापारियों को परेशान करने का गंभीर आरोप लगाया है।

By: Nivedita 
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भोपाल मास्टर प्लान मामला: कांग्रेस का सरकार पर तीखा हमला, पीसी शर्मा बैठे 31 घंटे के उपवास पर

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मास्टर प्लान को लंबे समय से लागू न किए जाने को लेकर सियासत पूरी तरह गरमा गई है। कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। इसी कड़ी में पूर्व मंत्री और विधायक पीसी शर्मा राजधानी के रोशनपुरा चौराहे पर 31 घंटे के सांकेतिक उपवास पर बैठ गए हैं, ताकि सरकार पर मास्टर प्लान को जल्द से जल्द लागू करने का दबाव बनाया जा सके।

जयवर्धन सिंह का बड़ा आरोप: “भाजपा चाहती है शहर में कटती रहें अवैध कॉलोनियां”

कांग्रेस विधायक एवं पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि मास्टर प्लान लागू न होने से केवल कांग्रेस कार्यकर्ताओं में ही नहीं, बल्कि पूरे भोपाल के नागरिकों में भारी आक्रोश है। जयवर्धन सिंह का आरोप है कि शहर में अनियोजित विकास और अवैध कॉलोनियों का बेतहाशा विस्तार सरकार की लचर नीतियों की वजह से हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार यही चाहती है कि शहर में अवैध कॉलोनियां कटती रहें और आम नागरिक, व्यापारी तथा डेवलपर्स अपनी समस्याओं के समाधान के लिए राजनेताओं और दलालों के चक्कर काटते रहने को मजबूर हों। व्यापारियों पर हुई कार्रवाई, दुकानों की सीलिंग और व्यापारिक परेशानियों को भी उन्होंने इसी व्यवस्थागत विफलता से जोड़ा है।

 

विकास कार्यों पर लग रहा ग्रहण, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

कांग्रेस का कहना है कि मास्टर प्लान के अभाव में भोपाल का सुनियोजित विकास ठप पड़ गया है। समय पर प्लान न आने से आम जनता, कॉलोनी डेवलपर्स और व्यापारियों को रोजमर्रा की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पीसी शर्मा के इस 31 घंटे के उपवास के जरिए सरकार को दो टूक चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द ही मास्टर प्लान को अमलीजामा नहीं पहनाया गया, तो कांग्रेस इस आंदोलन को और अधिक व्यापक और उग्र रूप देगी। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कांग्रेस के इस दबाव के बाद सरकार इस महत्वपूर्ण और संवेदनशील मसले पर क्या रुख अपनाती है।

 

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