मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने केन-बेतवा लिंक परियोजना के विस्थापित परिवारों के मुआवजे और पुनर्वास में भ्रष्टाचार को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार को घेरा है। हाल ही में लोकायुक्त द्वारा एक पटवारी को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद प्रदेश की सियासत गरमा गई है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार विधानसभा में सब कुछ ठीक होने का दावा करती रही, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त इसके बिल्कुल विपरीत है।

जीतू पटवारी ने लोकायुक्त की इस कार्रवाई का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि जब प्रशासन विस्थापित परिवारों को हर संभव मदद और पारदर्शी प्रक्रिया का दावा करता है, तो फिर मुआवजा और फाइल आगे बढ़ाने के एवज में पैसे क्यों वसूले जा रहे हैं? लोकायुक्त ने कार्रवाई के दौरान रिश्वत की मांग और लेन-देन का मामला पकड़ा है। पटवारी के अनुसार, यह केवल एक कर्मचारी की गड़बड़ी नहीं है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में फैले भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यह पूरा मामला सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उन 1321 विस्थापित परिवारों के हकों से जुड़ा है जिन्हें इस परियोजना के कारण अपनी ज़मीन और आजीविका छोड़नी पड़ी है। सरकार ने विधानसभा में लिखित जवाब देकर यह स्पष्ट किया था कि मुआवजा निर्धारण और पुनर्वास लाभों के वितरण में किसी भी तरह की अनियमितता नहीं हुई है। अब लोकायुक्त के इस खुलासे ने सरकार के उन दावों और आंकड़ों की पोल खोल दी है।
विस्थापितों के हक के लिए आवाज उठाते हुए जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस पूरी मुआवजा और पुनर्वास प्रक्रिया की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच कराई जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए ताकि गरीब और विस्थापित परिवारों के साथ न्याय हो सके। सरकार को स्पष्ट करना होगा कि वह भ्रष्ट तंत्र के साथ है या विस्थापितों के अधिकारों के साथ।