भोपाल: नगर निगम भोपाल में आयोजित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) से संबंधित बैठक में पार्षदों ने शहर की स्वच्छता व्यवस्था और कचरा प्रबंधन से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। बैठक में कचरे के वैज्ञानिक निपटान, उसके बेहतर उपयोग और भविष्य की कार्ययोजना पर चर्चा की गई, लेकिन जनप्रतिनिधियों ने कुछ प्रस्तावों को लेकर अपनी चिंताएं भी सामने रखीं।
बैठक के दौरान पार्षदों ने आशंका जताई कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के नाम पर आम जनता पर नए कर या अतिरिक्त शुल्क का बोझ डाला जा सकता है। उन्होंने प्रशासन से स्पष्ट नीति सामने रखने की मांग की, ताकि नागरिकों में किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति न बने।
नेता प्रतिपक्ष मोहम्मद सरवर सहित कई पार्षदों ने शहर में पॉलीथिन और सेनेटरी वेस्ट के कारण नालियों के बार-बार चोक होने की समस्या को गंभीर बताया। उनका कहना था कि इन अपशिष्टों के उचित प्रबंधन और नियंत्रण के लिए प्रभावी रणनीति तैयार करने की आवश्यकता है, अन्यथा बरसात के मौसम में जलभराव और गंदगी की समस्या और बढ़ सकती है।
बैठक में कुछ गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए। पार्षदों ने आरोप लगाया कि कुछ संस्थाएं केवल कागजी कार्यवाही तक सीमित हैं और जमीनी स्तर पर अपेक्षित परिणाम दिखाई नहीं दे रहे हैं। उन्होंने ऐसे मामलों की समीक्षा और जवाबदेही तय करने की मांग की।
सफाई व्यवस्था को लेकर भी बैठक में गंभीर चर्चा हुई। पार्षदों ने कहा कि नगर निगम में सेवानिवृत्त और दिवंगत सफाई कर्मचारियों के स्थान पर नई भर्तियां नहीं होने के कारण कर्मचारियों की संख्या लगातार कम हो रही है। इसका सीधा असर शहर की सफाई व्यवस्था पर पड़ रहा है।
जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्तियां करने और सफाई व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। उनका कहना था कि पर्याप्त मानव संसाधन के बिना स्वच्छता अभियान के लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होगा।
फिलहाल बैठक में उठाए गए मुद्दों के बाद अब सभी की नजर नगर निगम प्रशासन पर है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्षदों द्वारा उठाई गई चिंताओं और सुझावों पर कितना अमल किया जाता है और शहर की स्वच्छता व्यवस्था को सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।