Home देश कोरोना जांच कराने पहुंचे व्यक्ति की सदर अस्पताल में मौत, बेटे ने अस्पताल पर लगाया लापरवाही का आरोप

कोरोना जांच कराने पहुंचे व्यक्ति की सदर अस्पताल में मौत, बेटे ने अस्पताल पर लगाया लापरवाही का आरोप

1 second read
0
47

नई दिल्ली : बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शुमार मुजफ्फरपुर का सदर अस्पताल एक बार फिर अपने लापरवाहियों के लिए सुर्खियों में बना हुआ है। जिसे लेकर सरकार की भरपूर आलोचना हो रही है। क्योंकि एक तरफ जहां अन्य राज्य सरकार अपने राज्य में संक्रमित कोरोना मरीजों के इलाज के लिए दिन रात अस्पताल व्यवस्था को दुरूस्त करने में लगे है। वहीं अस्पताल प्रशासन भी कोरोना संक्रमित मरीजों को सुरक्षित करने में जुटे है।

जबकि इस सबसे अलग तस्वीर बिहार का है, जहां सरकार के साथ-साथ अस्पताल प्रशासन और पूरा महकमा ही सुस्त नजर आ रहा है। क्योंकि एक तरफ जहां कोरोना तेजी से बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में अपना पैर फैला रहा है। वहीं यहां कोरोना टेस्ट करने और उसकी रिपोर्ट की गति उतनी ही धीमी है। अगर किसी मरीज की हालत बेहद खराब है, तो यहां उसे भर्ती करने से पहले कोरोना टेस्ट रिपोर्ट लाने को कहा जाता है, जिसे लेकर मरीज तो कतार में खड़ा हो जाता है, लेकिन उसकी बारी कब आयेगी। उसका रिपोर्ट कब आयेगा इसका कोई समय तय नहीं है। जिस कारण कई बार मरीज कतार में खड़े ही मौत का शिकार हो जाते है।

एक ऐसा ही मामला बिहार के मुजफ्फरपुर के सदर अस्पताल का है। जहां कोरोना जांच कराने पहुंचे मोतीपुर के कथैया निवासी 48 वर्षीय बालेंद्र तिवारी की शुक्रवार सुबह लाइन में ही मौत हो गई। परिजनों के अनुसार वह सदर अस्पताल के इमरजेंसी में इलाज कराने पहुंचे थे। डॉक्टरों ने इलाज करने से पहले उन्हें कोरोना जांच कराने के लिए भेजा। यहां लाइन में लगने के कुछ ही समय बाद वह गिर गए। देखते ही देखते उनकी मौत हो गई।

वहीं, उनकी मौत के ढाई घंटे तक शव जांच केंद्र परिसर में पड़ा रहा, लेकिन न तो कोई स्वास्थ्य अधिकारी पहुंचे और न ही कोई स्वास्थ्य कर्मी। जब वरीय अधिकारियों को इसकी जानकारी हुई तो आनन-फानन में नगर थाना को सूचना दी गई। पुलिस शव को अपने कब्जे में लेकर दिन के 11 बजे परिजन के सहमति से शव को गांव भेज दिया गया। लेकिन शव को गांव पहुंचने से पहले ही कोरोना के भय से शव को इलेक्टिक शव दाह गृह में अंतिम संस्कार कर दिया गया। वहीं दूसरी तरफ गांव के लोग कोरोना के भय से मृतक के परिजनों से मिलने से कतरा रहे है, जिससे इस विकट विपदा में भी इस परिवार को सहारा देने वाला कोई नहीं है।

मृतक के बेटे रौशन तिवारी ने सदर अस्पताल पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि उसके पिता इमरजेंसी इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन उन्हें भर्ती नहीं किया। उन्हें भर्ती करने से पहले कोरोना रिपोर्ट लाने को कहा गया। जब वे रिपोर्ट लाने के लिए काउंटर पर गये तो वहां भारी भीड़ थी और उन्हें कतार में खड़े होने को कहा गया। बहुत समय तक भी जब उनका नंबर नहीं आया तो, अचानक वो बेहोश होकर वहीं गिर पड़े। और उनकी जान चली गई।

अब सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक मरीज के इमरजेंसी हालत में रहने के बाद भी अस्पताल में उन्हें तुरंत भर्ती नहीं किया जायेगा। क्या उन्हें ऐसे ही अपनी मौत और जिंदगी से जंग लड़ना होगा? अगर हां तो, अस्पताल और डॉक्टरों की क्या जरूरत ?

Load More In देश
Comments are closed.