दिल्ली : प्रधानमंत्री Narendra Modi ने लोकसभा में Iran-Israel और United States के बीच बढ़ते संघर्ष के बीच पश्चिम एशिया में उत्पन्न संकट पर विस्तृत बयान दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत इन हमलों का विरोध करता है और Strait of Hormuz में किसी भी तरह की बाधा अस्वीकार्य है, क्योंकि यह वैश्विक व्यापार और भारत की ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार इस पूरे संकट में संवेदनशील, सतर्क और सक्रिय है। भारत की ऊर्जा जरूरतों—जैसे कच्चा तेल, गैस और उर्वरक—का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है, इसलिए सरकार का प्रमुख फोकस यह सुनिश्चित करना है कि पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति पर न्यूनतम प्रभाव पड़े। युद्ध के कारण जहाजों की आवाजाही चुनौतीपूर्ण हो गई है, लेकिन इसके बावजूद सप्लाई चेन को बनाए रखने के प्रयास जारी हैं।
उन्होंने कहा कि इस युद्ध ने भारत के सामने आर्थिक, सुरक्षा और मानवीय-तीनों तरह की चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। पश्चिम एशिया भारत के लिए एक प्रमुख व्यापारिक मार्ग है, और वहां अस्थिरता का असर सीधे देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इसके अलावा, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सरकार ने 24×7 कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन शुरू की हैं। अब तक 3.75 लाख से अधिक भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है।
ऊर्जा सुरक्षा को लेकर प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत ने पिछले वर्षों में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण पर विशेष ध्यान दिया है। वर्तमान में देश के पास 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक का स्ट्रेटेजिक रिजर्व है, जिसे आगे बढ़ाने की योजना है। साथ ही, रिफाइनरी क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और अलग-अलग देशों से तेल आयात बढ़ाकर 27 से 41 देशों तक कर दिया गया है।
उन्होंने इथेनॉल ब्लेंडिंग को भी एक बड़ी उपलब्धि बताया, जिससे तेल आयात में कमी आई है। अब भारत पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण के करीब पहुंच चुका है, जिससे हर साल करोड़ों बैरल तेल की बचत हो रही है।
खेती और खाद्यान्न को लेकर प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि देश में पर्याप्त अनाज उपलब्ध है और खरीफ सीजन की तैयारियां पूरी हैं। बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए कोयले का पर्याप्त स्टॉक रखा गया है और पावर सप्लाई सिस्टम की लगातार निगरानी की जा रही है।
अंत में प्रधानमंत्री ने संसद से एकजुट संदेश देने की अपील करते हुए कहा कि वैश्विक संकट के इस दौर में भारत शांति, स्थिरता और सहयोग की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाता रहेगा।