अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और मध्य पूर्व में जारी युद्ध जैसी स्थिति का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिससे भारतीय शेयर बाजार पर भारी दबाव बना हुआ है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से विदेशी मुद्रा बचाने और तेल की खपत कम करने की अपील की है। सरकार का फोकस देश के विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने पर है, जिसके चलते कुछ एहतियाती कदम भी उठाए गए हैं।
लगातार दूसरे दिन बाजार में गिरावट देखने को मिली है। सेंसेक्स इंट्रा-डे में 75,200 के स्तर तक फिसल गया, जबकि निफ्टी 50 23,596 तक गिर गया। निफ्टी आईटी इंडेक्स में भी 3% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
बाजार गिरावट का सबसे अधिक असर आईटी सेक्टर पर देखा गया। Tata Consultancy Services, Infosys, Tech Mahindra और HCL Technologies के शेयरों में 2% से 4% तक की गिरावट दर्ज की गई।
विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, 2026 में अब तक FII द्वारा लगभग 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बिकवाली की जा चुकी है, जिससे बाजार में अस्थिरता बढ़ी है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और होर्मुज स्ट्रेट में तनाव ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। इसका असर सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरे एशियाई बाजारों पर देखने को मिल रहा है, जिससे निवेशकों में डर का माहौल बना हुआ है।