उज्जैन में 11 साल की बच्ची की इलाज के दौरान मौत के मामले ने प्रशासन को एक्शन मोड में ला दिया है। घटना के बाद निजी क्लीनिकों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं, जिसके चलते जांच अभियान तेज कर दिया गया है।
कलेक्टर के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में 38 निजी क्लीनिकों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान कई क्लीनिक बिना पंजीयन संचालित पाए गए, जबकि कुछ स्थानों पर डॉक्टर अपनी योग्यता से अलग इलाज करते हुए मिले।
जांच के बाद विभाग ने संबंधित क्लीनिक संचालकों को नोटिस जारी कर दिया है और रिपोर्ट आगे की कार्रवाई के लिए सीएमएचओ कार्यालय को भेजी गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह पूरा मामला मंछामन कॉलोनी स्थित एक निजी क्लीनिक से जुड़ा है, जहां इलाज के दौरान 11 वर्षीय दिव्या सूर्यवंशी की मौत हो गई थी। परिजनों ने लापरवाही के आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन भी किया था, जिसके बाद क्लीनिक को सील कर दिया गया था।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अब अभियान का मुख्य उद्देश्य मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और अवैध चिकित्सा गतिविधियों पर रोक लगाना है। वहीं, बच्ची की मौत के मामले की जांच अभी भी जारी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।