उज्जैन में आगामी सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए स्वच्छ ऊर्जा आधारित तकनीक का उपयोग बढ़ाया जा रहा है। इसी क्रम में एमपी एग्रो द्वारा एक आधुनिक सोलर वाटर टैंकर तैयार किया गया है, जो बिना बिजली के शुद्ध और ठंडा पेयजल उपलब्ध कराएगा। यह नवाचार बड़े धार्मिक आयोजनों में लाखों श्रद्धालुओं के लिए राहत का साधन बन सकता है।

सिंहस्थ-2028 के लिए ग्रीन एनर्जी की नई पहल
यह हाईटेक सोलर वाटर टैंकर पूरी तरह सोलर एनर्जी पर आधारित है। इसमें लगाए गए 565 वॉट के सोलर पैनल सूर्य की रोशनी से ऊर्जा उत्पन्न करते हैं, जिससे आरओ सिस्टम और चिलर यूनिट संचालित होती है। इसी प्रक्रिया के जरिए पानी को फिल्टर कर ठंडा किया जाता है।
इस सिस्टम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे चलाने के लिए किसी बाहरी बिजली कनेक्शन की आवश्यकता नहीं होती। जैसे ही सूर्य की रोशनी सोलर पैनल पर पड़ती है, पानी को शुद्ध और ठंडा करने की प्रक्रिया स्वतः शुरू हो जाती है।
फिलहाल इस सोलर वाटर टैंकर का परीक्षण उज्जैन के कोठी रोड स्थित एमपी स्टेट एग्रो कार्यालय के बाहर किया जा रहा है। यहां आने वाले आम नागरिक, कर्मचारी और अन्य लोग इस सुविधा का लाभ ले रहे हैं।
अधिकारियों के अनुसार, इस तकनीक का उपयोग पहले कृषि मेलों में भी किया जा चुका है, जहां किसानों और ग्रामीणों ने इसे काफी उपयोगी और प्रभावी बताया था।
एमपी एग्रो उज्जैन संभाग के क्षेत्रीय प्रबंधक पवन परमार के अनुसार, यह सोलर वाटर सिस्टम सिंहस्थ-2028 जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में बेहद उपयोगी साबित होगा। इससे लाखों श्रद्धालुओं को बिना बिजली के स्वच्छ और ठंडा पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल केवल धार्मिक आयोजनों ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों, सार्वजनिक स्थलों और आपदा प्रबंधन जैसी स्थितियों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
सोलर वाटर टैंकर जैसी ग्रीन एनर्जी आधारित तकनीक उज्जैन में पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक सुविधाओं का बेहतरीन उदाहरण पेश कर रही है, जो सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को और अधिक मजबूत बनाती है।