अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध को 1 महीन से उपर हो गया और खत्म होने का नाम ही नही ले रहा है। बता दें कि 3अप्रैल 2026 को जंग में अमेरिकी F-15E स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमान को ईरान ने निशाना बनाया जिस वजह से विमान पूरी तरह से घायल हो गया और विमान में दो क्रू थे, पायलट और वेपन्स सिस्टम ऑफिसर (WSO), दोनों पैराशूट की मदद से विमान से कूदे लेकिन वे अलग-अलग जगहों पर उतरे।
फिर कुछ दिनों बाद डोनाल्ड ट्रंप को एक तीन शब्दों का SOS संदेश मिला जिसमें लिखा था God is good। शुरू में अमेरिकी अधिकारियों को शक हुआ कि ये दुश्मन देश ईरानी फोर्स का जाल हो सकता है उन्हें लगा कि शायद ईरानी सैनिक इस संदेश का इस्तेमाल करके अमेरिकी बचाव टीम को फंसाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन जब डोनाल्ड ट्रंप को रेडियो पर सुनाई दिया Power be to God जैसा कुछ और यह सुनकर लगा कि यह कोई मुस्लिम व्यक्ति बोल रहा है, बाद में पता चला कि यह अधिकारी बहुत धार्मिक है इसलिए उसने यह कहा था। बाद में डिफेंस अधिकारियों ने पुष्टि की के संदेश God is good ही था।
बता दें कि, जो दो क्रू पैराशूट की मदद से विमान से कूदे थे, उसमे से एक घायल WSO ने पहाड़ की एक दरार में छिपकर 24 घंटे से ज्यादा समय तक पहाड़ी इलाके में जिंदा रहकर खुद को बचाया। उसके चारों तरफ हजारों ईरानी सैनिक और स्थानीय लोग उसे ढूंढ रहे थे क्योंकि तेहरान सरकार ने उसके लिए इनाम की घोषणा कर दी थी। अधिकारी ने सुरक्षित एन्क्रिप्टेड डिवाइस से अमेरिकी फोर्स से संपर्क किया और आखिरकार अमेरिकी सर्वेलांस टेक्नोलॉजी ने उसकी सटीक लोकेशन ट्रैक कर ली और बचाव के लिए हाई रिस्क नाइट स्पेशल फोर्स मिशन चलाया गया जिसमें 200 सैनिक थे।
यह मिशन रात में हुआ। इससे पहले दिन में एक और तेज बचाव अभियान चलाकर F-15E पायलट को भी निकाला गया था जो कुछ मील दूर उतरा था। अमेरिकी डिफेंस अधिकारियों पहले बचाव को bold and quick snatch कहा जो भारी ईरानी गोलीबारी के बीच हुआ।
बता दें कि जब क्रू का पता चला तब CIA ने बचाव के लिए ईरान के एक झूठी खबर फैलाई कि एयरमैन को पहले ही ढूंढ लिया और उसे जमीन रास्ते से बाहर निकाला जा रहा है। इसका मकसद था कि ईरानी सर्च टीम गलत जगह पर चली जाए और असली WSO की जगह का पता न चले। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने खास टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके अधिकारी की लोकेशन कन्फर्म की और लोकेशन मिलने के बाद समन्वय व्हाइट हाउस और पेंटागन के साथ किया गया। ट्रंप ने बताया कि इजरायल ने इस ऑपरेशन में सीमित मदद दी, इजरायली खुफिया एजेंसी ने ईरानी सैनिकों की मूवमेंट की जानकारी दी।