उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेला 2028 की तैयारियों को लेकर अब संत समाज भी सक्रिय नजर आ रहा है। देशभर से पहुंचे करीब 700 संतों के प्रतिनिधिमंडल ने शहर में चल रहे विकास और निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। संतों ने तैयारियों पर संतोष जताया, लेकिन खालसा भूमि पर अतिक्रमण और अवैध निर्माण को लेकर प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग भी की।

महाकाल दर्शन से शुरू हुआ संतों का दौरा
अखिल भारतीय खालसा परिषद के अध्यक्ष स्वामी माधवाचार्य के नेतृत्व में संतों का दल उज्जैन पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने सबसे पहले महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में दर्शन-पूजन किया। इसके बाद हजारीबाग हनुमान मंदिर, पवासा और दिगंबर अखाड़े में धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और चरण पादुका पूजन किया।
संतों ने सिंहस्थ-2028 से जुड़े विभिन्न निर्माण कार्यों का जायजा लिया। इस दौरान मंगलनाथ-अंगारेश्वर क्षेत्र, Shipra River के घाट, साधु-संतों के पड़ाव क्षेत्र और प्रमुख धार्मिक स्थलों का दौरा किया गया। रामादल अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष डॉ. रामेश्वर दास ने संतों को सिंहस्थ की तैयारियों की जानकारी देते हुए बताया कि शिप्रा नदी पर करीब 29 किलोमीटर नए घाट बनाए जा रहे हैं। इसके साथ ही शहर में सड़क चौड़ीकरण, पुल निर्माण, ट्रैफिक प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट पर काम जारी है।
स्वामी माधवाचार्य ने कहा कि सिंहस्थ-2028 को “दिव्य और भव्य” बनाने की दिशा में अच्छे प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि उन्होंने खालसा भूमि पर बढ़ते अतिक्रमण और अवैध निर्माण को गंभीर मुद्दा बताते हुए प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की। संतों का कहना है कि सिंहस्थ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति और परंपरा का वैश्विक प्रतीक है। इसलिए साधु-संतों की भूमि और धार्मिक क्षेत्रों का मूल स्वरूप सुरक्षित रखा जाना जरूरी है।
प्रशासन का दावा है कि सिंहस्थ-2028 को अब तक का सबसे व्यवस्थित और हाईटेक आयोजन बनाने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जाएगा ताकि आयोजन सुचारु रूप से संपन्न हो सके।