उज्जैन। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत अपील और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशों का असर अब प्रशासनिक व्यवस्था में साफ दिखाई देने लगा है। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के निरीक्षण के दौरान अब अधिकारी अलग-अलग वाहनों की बजाय एक ही बस में यात्रा कर रहे हैं।
बुधवार को संभागायुक्त एवं सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह, कलेक्टर रोशन कुमार सिंह, नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा, यूडीए सीईओ संदीप सोनी सहित विभिन्न विभागों के लगभग 15 अधिकारी ट्रैवलर बस में बैठकर 29 किलोमीटर लंबे घाट क्षेत्र के निरीक्षण पर पहुंचे।
पहले इस निरीक्षण के लिए लगभग 15 वाहनों का काफिला निकलता था, जिससे प्रतिदिन करीब 6750 रुपये तक ईंधन खर्च होता था। अब एक बस के माध्यम से निरीक्षण किए जाने से यह खर्च घटकर लगभग 250 रुपये के स्तर तक आ गया है। इसके साथ ही ट्रैफिक दबाव में भी कमी आई है।
प्रशासन का मानना है कि इस नई व्यवस्था से न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय भी स्थापित होगा। सभी अधिकारी एक साथ क्षेत्रीय निरीक्षण कर समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित कर सकेंगे।
सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच उज्जैन प्रशासन की यह पहल अब ‘फ्यूल सेविंग मॉडल’ के रूप में चर्चा में है। इसका उद्देश्य सरकारी खर्च को कम करना और संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।