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कनाडा का तेल हर देश में जाता है लेकिन भारत क्यों नही लेता?

आज जहां पूरी दुनिया तेल की बढ़ती कीमतों से परेशान है वही दूसरी तरफ कनाडा के पास तेल की खदान मौजूद है. कनाडा अपनी प्राकृतिक संसाधनों जैसे कि पीने का पानी हो, प्राकृतिक गैस हो, कोयला हो या सोने की खान हो उसे ज्यादा महत्व देता है. बता दें कि कनाडा का तेल कई देशों में जाता है लेकिन भारत में नही. जानिए क्यों भारत स्ट्रेट औफ होर्मुज से तेल लेता है लेकिन कनाडा से नही?

By: BS Yadav 
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कनाडा का तेल हर देश में जाता है लेकिन भारत क्यों नही लेता?

आज जहां पूरी दुनिया तेल की बढ़ती कीमतों से परेशान है वही दूसरी तरफ कनाडा के पास तेल की खदान मौजूद है. कनाडा अपनी प्राकृतिक संसाधनों जैसे कि पीने का पानी हो, प्राकृतिक गैस हो, कोयला हो या सोने की खान हो उसे ज्यादा महत्व देता है. बता दें कि कनाडा का तेल कई देशों में जाता है लेकिन भारत में नही. जानिए क्यों भारत स्ट्रेट औफ होर्मुज से तेल लेता है लेकिन कनाडा से नही?

देश का तेल भंडार
देश के कुल तेल भंडार का 80 फीसदी से ज्यादा हिस्सा पश्चिमी प्रांत अल्बर्टा में स्थित है. यह इलाका तेल उत्पादन का केंद्र है, जहां ऑयल सैंड्स के जरिए बड़े पैमाने पर तेल निकाला जाता है लेकिन समस्या ये है कि तेल ओंटारियो, क्यूबेक और न्यू ब्रंसविक जैसे देशों में है जहां जरूरत कम है, और जहां जरूरत ज्यादा है वहा तेल नही है. कनाडा एक ऐसा देश है जहां तेल ही नही प्राकृतिक संसाधनों पे भी पुरी महत्व दिया जाता है. कनाडा दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देशों में शामिल है, वह रोजाना 50 लाख बैरल से ज्यादा तेल निकालता है, लेकिन उसे हर साल अरबों डॉलर खर्च कर के विदेशों से कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने पड़ते हैं.

तेल की आर्थिक और लॉजिस्टिक चुनौती
जमीन से निकला हुआ तेल सीधे पेट्रोल या डीजल नहीं बन जाता. उसे पाइपलाइनों, भंडारण केंद्रों और रिफाइनरियों के जटिल नेटवर्क से गुजरना पड़ता है और अगर इस नेटवर्क की कोई भी कड़ी कमजोर हो, तो संसाधनों की भरमार भी बेकार साबित हो सकती है.
बता दें कि, अल्बर्टा से निकलने वाला तेल इतना गाढ़ा और चिपचिपा होता है कि सामान्य तापमान पर लगभग सड़क बनाने में इस्तेमाल होने वाले तारकोल जैसा लगता है. इसे पाइपलाइन में बहाने के लिए हल्के हाइड्रोकार्बन के साथ मिलाना पड़ता है वही अंतरराष्ट्रीय बाजार में मिलने वाला कच्चा तेल हल्का और तरल होता है, आसानी से बहता है और उसे प्रोसेस करना आसान और सस्ता होता है.

भारत कनाडा से तेल क्यों नही ले रहा?
भारत स्ट्रेट औफ होर्मुज से युद्ध में भी तेल के लिए आवाजाही कर रहा है लेकिन कनाडा से तेल न लेने के पीछे मुख्य रूप से लॉजिस्टिक्स, आर्थिक और बुनियादी ढांचे से जुड़ी चुनौतियां हैं, न कि कोई राजनीतिक प्रतिबंध.बता दें कि कनाडा से भारत तक तेल लाने का समुद्री रास्ता बहुत लंबा है. और अगर तेल लेने जाए भी तो तेल से अधिक लागत लग जाती है, जिस वजह से पश्चिम एशिया से तेल लाने आसान लगता है
और कनाडा का अधिकांश तेल क्षेत्र चारों तरफ से जमीन से घिरा हुआ है जिस वजह से उनके पास अपने तेल को तटीय बंदरगाहों तक पहुँचाने के लिए पर्याप्त पाइपलाइनें नहीं हैं, ताकि उसे भारत जैसे दूर के बाजारों में आसानी से भेजा जा सके. बता दें कि कनाडा अपना 98% से अधिक तेल और ऊर्जा अमेरिका को निर्यात करता है.

क्या भविष्य में संबंध बदलेंगे?
हालिया रिपोर्टों 2025-2026 के अनुसार, कनाडा भारत के साथ ऊर्जा व्यापार बढ़ाने में रुचि दिखा रहा है क्योंकि उसने अपनी पाइपलाइन का विस्तार किया है। हालांकि, लॉजिस्टिक्स की चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं, इसलिए कनाडा का तेल वर्तमान में भारत के लिए आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं है।

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