भारत ने चिनाब नदी से जुड़ी दो प्रमुख परियोजनाओं पर काम शुरू कर दिया है, जिनका उद्देश्य अतिरिक्त जल को ब्यास बेसिन की ओर मोड़ना है। इन परियोजनाओं को जल संसाधन प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मुख्य परियोजना के तहत लाहुल-स्पीति क्षेत्र में 8.7 किलोमीटर लंबी चिनाब-ब्यास लिंक टनल बनाई जा रही है। इस सुरंग के माध्यम से चिनाब नदी का पानी ब्यास नदी में स्थानांतरित किया जाएगा, जिससे जल संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा।
इन दोनों परियोजनाओं का संचालन नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (NHPC) के तहत किया जा रहा है। इन पर कुल लगभग 2,600 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है, जिसमें से प्रमुख टनल प्रोजेक्ट की लागत करीब 2,352 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
परियोजना के साथ-साथ चिनाब नदी के गाद (सिल्ट) प्रबंधन सिस्टम को भी मजबूत किया जा रहा है, ताकि जल प्रवाह और भंडारण क्षमता में सुधार हो सके।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत ने सिंधु जल संधि के तहत पश्चिमी नदियों के उपयोग को लेकर अपना रुख और सख्त किया है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद संधि को लेकर भारत के रुख में बदलाव देखा गया था, जिसके बाद जल प्रबंधन से जुड़े कई नए प्रोजेक्ट तेज किए गए हैं।