पश्चिम बंगाल में मदरसों में ‘वंदे मातरम’ को अनिवार्य किए जाने के आदेश के बाद राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। सरकार के इस फैसले पर विपक्षी दलों और कुछ मुस्लिम संगठनों ने आपत्ति जताते हुए इसे विवादित और थोपे जाने वाला कदम बताया है।
राज्य के अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग के तहत आने वाले सभी मदरसों में ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य किया गया है। यह आदेश 19 मई को जारी किया गया था, जिसकी जानकारी बाद में सार्वजनिक हुई।
विपक्षी दलों ने इस निर्णय को राज्य सरकार का मनमाना कदम बताते हुए कहा है कि इससे देश की बहुलवादी संस्कृति पर असर पड़ सकता है। विपक्ष का कहना है कि ऐसे फैसलों से सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचने का खतरा है।
कुछ मुस्लिम संगठनों ने इस आदेश का विरोध करते हुए कहा है कि इसे समुदाय विशेष पर थोपना गलत है। वहीं कुछ धार्मिक नेताओं ने कहा कि राष्ट्रभक्ति के भाव का सम्मान होना चाहिए, लेकिन इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
इस मुद्दे पर राज्य में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पक्ष और विपक्ष दोनों अपने-अपने तर्क रख रहे हैं, जिससे मामला और अधिक संवेदनशील बन गया है।