देश में एक बार फिर पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की चिंता बढ़ा दी है। लगातार बढ़ती महंगाई के बीच ईंधन के दाम बढ़ने से लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आ रहा है। सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर सरकार को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं जहां कई नेताओं ने पेट्रोल और डीजल के बड़ते रेट को सेकर सवाल उठाएं हैं।
आम जनता का कहना है कि पहले से ही खाने-पीने की चीजें, गैस सिलेंडर और रोजमर्रा का सामान महंगा हो चुका है। ऐसे में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी ने लोगों का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है, तो वहा कई लोगों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार आम जनता को खर्च कम करने की सलाह देती है, लेकिन खुद महंगाई कम करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भी विपक्ष और जनता के एक वर्ग ने सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि जब देश की जनता महंगाई से परेशान है, तब सरकार को जनता की समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने भी केंद्र सरकार को जमकर घेरा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों ने गरीब और मध्यम वर्ग की कमर तोड़ दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार टैक्स के जरिए जनता पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है।
पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच पंजाब बीजेपी अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया। उन्होंने कहा,“मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का आभारी हूं कि उन्होंने खाड़ी युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की आसमान छूती कीमतों का बोझ हमारे किसानों पर नहीं पड़ने दिया। जहां भारत सरकार यूरिया लगभग 100 रुपये प्रति किलो की दर से आयात कर रही है, वहीं किसानों को यह सिर्फ 6 रुपये प्रति किलो में उपलब्ध कराया जा रहा है। 45 किलो का एक बैग, जिसकी आयात लागत करीब 4,500 रुपये है, किसानों को मात्र 266 रुपये में दिया जा रहा है।”
वहीं, बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने इस पूरे विवाद पर अलग और अनोखा तर्क दिया। उन्होंने झारखंड के हालात का जिक्र करते हुए कहा, ईरान संकट शुरू होने के बाद हमारे झारखंड में 100 रुपये में मिलने वाली शराब की बोतल अब सीधे 200 रुपये की हो गई है। इस पर राज्य में कोई आंदोलन नहीं हो रहा। फिर पेट्रोल-डीजल के दाम दो-चार रुपये बढ़ने पर देशभर में इतना हंगामा क्यों मचाया जा रहा है?
वहीं आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने कहा कि केंद्र सरकार को ईंधन पर टैक्स कम करना चाहिए ताकि लोगों को राहत मिल सके। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि महंगाई ने किसानों, मजदूरों और नौकरीपेशा लोगों की जिंदगी मुश्किल कर दी है।
विपक्ष का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आने के बावजूद देश में पेट्रोल-डीजल सस्ता नहीं किया जा रहा। वहीं सरकार का तर्क है कि वैश्विक परिस्थितियों और आयात लागत बढ़ने का असर ईंधन की कीमतों पर पड़ रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार जनता को राहत देने के लिए कोई बड़ा फैसला लेगी? क्या आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल के दाम कम होंगे? फिलहाल जनता महंगाई से राहत की उम्मीद लगाए बैठी है और इस मुद्दे पर राजनीति लगातार गर्म होती जा रही है।