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बुरहानपुर-खंडवा रेल रूट पर ट्रेन ठहराव की मांग को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज

बुरहानपुर-खंडवा रेल मार्ग पर छोटे स्टेशनों पर पैसेंजर ट्रेनों के ठहराव की मांग को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है। 40 से अधिक गांवों के लोग कोविड के बाद बंद हुए स्टॉपेज को बहाल करने की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों ने असीरगढ़ रोड स्टेशन पर ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी है कि यदि 31 मई तक मांग पूरी नहीं हुई तो वे भूख हड़ताल शुरू करेंगे। उनका कहना है कि ट्रेनें न रुकने से छात्रों, मजदूरों और आम लोगों को भारी परेशानी हो रही है।

By: Nivedita 
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बुरहानपुर-खंडवा रेल रूट पर ट्रेन ठहराव की मांग को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज

बुरहानपुर से खंडवा के बीच स्थित छोटे रेलवे स्टेशनों पर पैसेंजर ट्रेनों के ठहराव को बहाल करने की मांग जोर पकड़ रही है। कोविड-19 के बाद बंद किए गए स्टॉपेज को लेकर 40 से अधिक गांवों के ग्रामीण लंबे समय से मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकलने पर लोगों में नाराजगी बढ़ गई है।

असीरगढ़ रोड स्टेशन पर सौंपा गया ज्ञापन

असीरगढ़ रोड रेलवे स्टेशन पर ग्राम पंचायत झिरी की सरपंच आशा कैथवास के नेतृत्व में कई गांवों के ग्रामीण एकत्र हुए और रेलवे मंत्रालय के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें पैसेंजर ट्रेनों के पुराने ठहराव को तुरंत बहाल करने की मांग की गई, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।

छात्रों, किसानों और मजदूरों को हो रही परेशानी

ग्रामीणों का कहना है कि छोटे स्टेशनों पर ट्रेनें नहीं रुकने से सबसे ज्यादा असर छात्रों, मजदूरों, किसानों, व्यापारियों और नौकरीपेशा लोगों पर पड़ रहा है। अब लोगों को कई किलोमीटर दूर बड़े स्टेशनों तक जाना पड़ता है, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ गए हैं।

बार-बार ज्ञापन के बावजूद नहीं हुआ समाधान

स्थानीय ग्रामीण विकास कैथवास ने बताया कि पिछले कई महीनों से शांतिपूर्ण तरीके से मांग की जा रही है, लेकिन केवल आश्वासन ही मिल रहा है। रेलवे प्रशासन की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में निराशा बढ़ती जा रही है।

31 मई तक अल्टीमेटम, भूख हड़ताल की चेतावनी

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि 31 मई तक पैसेंजर ट्रेनों का ठहराव बहाल नहीं किया गया, तो वे भूख हड़ताल शुरू करेंगे। उन्होंने साफ कहा कि यह आंदोलन अब और तेज किया जाएगा यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं।

गांवों की जीवनरेखा बनी रेलवे सेवा

महिला सरपंच आशा कैथवास ने कहा कि यह मुद्दा केवल ट्रेन स्टॉपेज का नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों की जीवनरेखा से जुड़ा हुआ है। ट्रेनों के ठहराव बंद होने से गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है और लोगों की दैनिक दिनचर्या पर गंभीर असर पड़ा है।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

ग्रामीणों ने साफ कहा है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। अब सभी की नजर रेलवे प्रशासन और सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है।

 

 

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