प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नॉर्वे की आधिकारिक यात्रा पर हैं, जहां वह तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भाग ले रहे हैं, लगभग 43 वर्षों के अंतराल के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का यह नॉर्वे दौरा है। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य व्यापार, निवेश और हरित प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत करना है।
पीएम मोदी इस समय में स्वीडन के गोथेनबर्ग में हैं। वहां उन्होंने स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन और यूरोपियन यूनियन की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन से मुलाकात की।
बती दें कि, वह यूएई और नीदरलैंड्स की यात्रा पूरी करके अपने पांच देशों के विदेशी दौरे के तीसरे चरण के तहत स्वीडन पहुंचे हैं, जहां वह द्विपक्षीय वार्ताओं और यूरोपीय उद्योग गोलमेज सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। वे भारत और नॉर्डिक्स देशों के बीच होने वाली महत्वपूर्ण ‘इंडिया-नॉर्डिक्स समिट’ और अन्य वैश्विक सम्मेलनों में हिस्सा लेने के लिए नॉर्वे, स्वीडन, नीदरलैंड्स और इटली के दौरे पर है
स्वीडन में पीएम मोदी कई महत्वपूर्ण बैठकों में शामिल हुए हैं। उनका मुख्य फोकस भारत और यूरोप के बीच व्यापार बढ़ाना है, AI में सहयोग बढ़ाना, नई नौकरियों और टेक्नोलॉजी पर चर्चा करना, रक्षा और सुरक्षा संबंध मजबूत करना और आतंकवाद के खिलाफ साझेदारी बढ़ाना। साथ ही उन्होंने यूरोप की बड़ी कंपनियों को भारत में निवेश करने का निमंत्रण भी दिया।
यह दौरा भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है। जहां पर पीएम मोदी 15 मई से 20 मई तक इन देशों के दौरे पर हैं- अरब, नीदरलैंड्, स्वीडन, नॉर्वे, इटली।
इस यात्रा का उद्देश्य व्यापार, ऊर्जा, टेक्नोलॉजी और रक्षा क्षेत्रों में नए समझौते करना है
*ऊर्जा सुरक्षा : पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच कच्चे तेल और एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना इन दौरों का सबसे बड़ा लक्ष्य है। इसके तहत भारत रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बनाने के लिए अन्य देशों से समझौते कर रहा है।
*व्यापार: इन यात्राओं के जरिए भारत विदेशी कंपनियों को देश के इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी सेक्टर में निवेश करने के लिए आकर्षित करता है, जिससे देश में रोजगार और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है।
*साझेदारी: नीदरलैंड, स्वीडन और अन्य देशों से आर्टिफिशल इंटेलिजेंस , सेमीकंडक्टर्स, और हरित ऊर्जा जैसी भविष्य की तकनीकों में साझेदारी करना यात्रा का प्रमुख एजेंडा होता है।
*वैश्विक भू-राजनीति में मजबूती: मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालातों में भारत को दुनिया की एक मजबूत महाशक्ति के रूप में स्थापित करना और ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की स्थिति को सबसे आगे रखना है।
पीएम मोदी 18 मई के बाद नॉर्वे जाएंगे। वहां वे इंडिया-नॉर्डिक समिट में हिस्सा लेंगे, जिसमें कई यूरोपीय देशों के नेता शामिल होंगे। इसके बाद उनका अंतिम दौरा इटली का होगा।
स्वीडन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कई बड़ी बैठकों में अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। यह बातचीत भारत और यूरोप के रिश्तों को मजबूत करने के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मोदी जी ने यूरोप की कंपनियों को भारत में निवेश बढ़ाने के लिए कहा।
* इलेक्ट्रिक वाहन (EV)
* ग्रीन एनर्जी
* सेमीकंडक्टर
* मैन्युफैक्चरिंग
इन क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने की बात हुई।
स्वीडन और अरब नेताओं के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नई टेक्नोलॉजी पर लंबी चर्चा हुई।
* AI रिसर्च
* साइबर सिक्योरिटी
* डिजिटल इंडिया
* स्टार्टअप सहयोग
जैसे विषय शामिल थे।
यूरोप और भारत ने रक्षा सहयोग मजबूत करने पर बात की।
* आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम
* समुद्री सुरक्षा
* नई रक्षा टेक्नोलॉजी
इनपर चर्चा हुई।
यूक्रेन-रूस युद्ध और वैश्विक तनाव पर भी चर्चा हुई। भारत ने शांति और बातचीत के जरिए समाधान की बात दोहराई।
मोदी जी ने कहा कि भारत ग्रीन एनर्जी में तेजी से काम कर रहा है और यूरोप के साथ मिलकर:
* सौर ऊर्जा
* हाइड्रोजन ईंधन
* स्वच्छ प्रौद्योगिकी
इनमें साझेदारी बढ़ाना चाहता है।
बैठक काफी सकारात्मक रहा। स्वीडन के प्रधानमंत्री ने भारत को भविष्य का बड़ा आर्थिक साझेदार बताया। वहीं मोदी जी ने कहा कि, भारत और यूरोप मिलकर दुनिया की नई आर्थिक ताकत बन सकते हैं। इन बैठकों के बाद कई नए समझौतों और निवेश योजनाओं की घोषणा भी होने की उम्मीद है।