सरकारी तेल कंपनियों ने चार साल बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। हालांकि इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक आने वाले समय में कीमतों में और इजाफा हो सकता है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने से कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार सरकारी तेल कंपनियों को हर महीने करीब 30,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो रहा था। फिलहाल भी पेट्रोल पर लगभग 11 रुपये और डीजल पर करीब 39 रुपये प्रति लीटर का घाटा बताया जा रहा है, जिसे कम करने के लिए कीमतों में बदलाव किया गया है।
ईंधन महंगा होने का सीधा असर महंगाई पर पड़ रहा है। ढुलाई लागत बढ़ने से राशन, फल-सब्जियों और रोजमर्रा की जरूरत की चीजों के दाम बढ़ने की संभावना है। इसका असर आम लोगों की बचत और मासिक बजट पर भी दिखाई दे रहा है।
दिल्ली-एनसीआर के आईटीओ, लक्ष्मी नगर, आईएनए, द्वारका, करोल बाग और मयूर विहार जैसे इलाकों में पेट्रोल पंपों पर सुबह से ही लंबी कतारें देखने को मिलीं। कई लोग पुरानी दर पर ईंधन भरवाने पहुंचे, लेकिन बढ़ी कीमतों की जानकारी मिलने पर नाराजगी भी जताई।
पेट्रोल की कीमत बढ़कर करीब 97.77 रुपये प्रति लीटर पहुंचने के बाद नौकरीपेशा और रोजाना निजी वाहन से यात्रा करने वाले लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। नोएडा में काम करने वाले एक आईटी प्रोफेशनल ने बताया कि अब मेट्रो जैसे सार्वजनिक परिवहन विकल्प ज्यादा किफायती लग रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहा तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल के दाम और बढ़ सकते हैं, जिसका असर सीधे आम जनता की जेब पर पड़ेगा।