मध्यप्रदेश के मैहर जिले में प्रभारी मंत्री राधा सिंह के दौरे के दौरान एक ओर सादगी और ईंधन बचत का संदेश दिया गया, वहीं दूसरी ओर उनके बड़े वीआईपी काफिले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। 15 मई 2026 को सामने आई तस्वीर में प्रभारी मंत्री, मैहर विधायक और जिला पंचायत अध्यक्ष के साथ एक ही वाहन में नजर आईं। इस पहल को लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत अपील से जोड़ते हुए सराहा।
दिनभर तारीफों के बीच शाम होते-होते सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने लगा, जिसमें प्रभारी मंत्री का लंबा काफिला दिखाई दिया। स्थानीय चर्चाओं के अनुसार काफिले में करीब एक दर्जन वाहन शामिल थे। वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए कि क्या ईंधन बचत का संदेश केवल औपचारिकता बनकर रह गया है।
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल-डीजल की बचत, सार्वजनिक परिवहन के उपयोग और अनावश्यक खर्च कम करने की अपील की थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रधानमंत्री ने अपने काफिले का आकार भी सीमित किया है और कई राज्यों में भी सादगी को बढ़ावा देने की पहल शुरू हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ता है। ऐसे में यदि सरकारी स्तर पर ईंधन की बचत को गंभीरता से लागू किया जाए तो इसका सकारात्मक असर अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इसी कारण अब जनता नेताओं और अधिकारियों से भी व्यवहारिक उदाहरण पेश करने की उम्मीद कर रही है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी सार्वजनिक रूप से सादगी और ट्रेन यात्रा जैसे संदेश दे चुके हैं। ऐसे में मैहर में वायरल हुए वीडियो के बाद यह बहस तेज हो गई है कि क्या जनप्रतिनिधि वास्तव में ईंधन बचत और सादगी को अपनाएंगे या यह संदेश केवल मंचों और तस्वीरों तक सीमित रहेगा।
मैहर की इस घटना ने एक बार फिर वीआईपी संस्कृति और सरकारी खर्च को लेकर चर्चा छेड़ दी है। लोगों का कहना है कि जब आम जनता से बचत और जिम्मेदारी की उम्मीद की जाती है, तब नेताओं और अधिकारियों को भी उसी सोच के साथ उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।