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चीनी की बढ़ती कीमतों पर लगाम, सरकार ने सितंबर 2026 तक बढ़ाई निर्यात रोक

भारत सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए चीनी के निर्यात पर लगी रोक को सितंबर 2026 तक बढ़ा दिया है। यह निर्णय बढ़ती गर्मी, मौसम में बदलाव और उत्पादन में संभावित कमी को देखते हुए लिया गया है। सरकार का मानना है कि निर्यात जारी रहने से देश में चीनी की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और कीमतें बढ़ सकती हैं। साथ ही, 2026-27 सत्र के लिए गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य बढ़ाकर ₹365 प्रति क्विंटल कर दिया गया है। यह कदम उपभोक्ताओं के लिए राहत भरा माना जा रहा है, हालांकि उद्योग जगत ने लंबे समय तक निर्यात रोक से नुकसान की आशंका जताई है।

By: Nivedita 
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चीनी की बढ़ती कीमतों पर लगाम, सरकार ने सितंबर 2026 तक बढ़ाई निर्यात रोक

भारत सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों को नियंत्रित रखने और आम जनता को राहत देने के उद्देश्य से चीनी के निर्यात पर लगी रोक को सितंबर 2026 तक बढ़ाने का फैसला किया है। सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब देश के कई हिस्सों में बढ़ती गर्मी, मौसम में बदलाव और उत्पादन संबंधी चिंताओं के कारण खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दबाव देखा जा रहा है।

चीनी निर्यात रोक जारी

सरकार का मानना है कि यदि बड़ी मात्रा में चीनी का निर्यात जारी रहता है, तो देश के भीतर इसकी उपलब्धता कम हो सकती है, जिससे बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र ने फिलहाल निर्यात पर प्रतिबंध जारी रखने का निर्णय लिया है। यह प्रतिबंध 30 सितंबर 2026 तक, या अगले आदेश तक जारी रहेगा।

क्यों लिया फैसला?

बता दें कि, भारत दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक देशों में शामिल है, लेकिन पिछले कुछ महीनों में मौसम के बदलते रुक ने, कभी कम बारिश तो कही अत्यधिक गर्मी, कमजोर गन्ने की पैदावार और अल-नीनो की वजह से उत्पादन कम होने की उम्मीद के कारण यह कदम उठाया गया है, ताकि घरेलू बाजार में चीनी की कीमत न बढ़े।

गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी

सरकार ने 2026-27 सीज़न अक्टूबर से शुरू के लिए गन्ने के उचित और लाभकारी मूल्य को बढ़ाकर ₹365 प्रति क्विंटल कर दिया है। हालांकि, चीनी मिलों और निर्यातकों का कहना है कि लंबे समय तक निर्यात बंद रहने से उद्योग को आर्थिक नुकसान हो सकता है। वहीं उपभोक्ताओं के लिए यह फैसला राहत भरा माना जा रहा है क्योंकि इससे घरेलू बाजार में चीनी की कीमतें स्थिर रहने की संभावना बढ़ेगी। सरकार आने वाले महीनों में उत्पादन, स्टॉक और बाजार की स्थिति की समीक्षा करने के बाद आगे की रणनीति तय करेगी।

 

 

 

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