केंद्र सरकार ने 13 मई 2026 को किसानों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी की घोषणा की है। सरकार के इस निर्णय से धान, कपास, तिलहन और दालों की खेती करने वाले लाखों किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में 14 खरीफ फसलों के नए MSP को मंजूरी दी गई। सरकार का कहना है कि किसानों की आय बढ़ाने और खेती को लाभकारी बनाने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया है।
सरकार के मुताबिक सभी फसलों का MSP उनकी उत्पादन लागत से कम से कम 50 प्रतिशत अधिक तय किया गया है। इससे किसानों को फसल का बेहतर दाम मिलने के साथ आर्थिक मजबूती भी मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि MSP में बढ़ोतरी से किसानों का खेती के प्रति भरोसा बढ़ेगा और वे अधिक उत्पादन के लिए प्रेरित होंगे।
इस बार सरकार ने सूरजमुखी, कपास, तिल और नाइजरसीड जैसी फसलों के समर्थन मूल्य में सबसे अधिक बढ़ोतरी की है।
* सूरजमुखी MSP में ₹622 प्रति क्विंटल की वृद्धि
* कपास MSP में ₹557 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी
* धान का नया MSP ₹2441 प्रति क्विंटल तय
सरकार का फोकस इस बार तिलहन और दाल उत्पादन बढ़ाने पर भी दिखाई दे रहा है।
सरकार का अनुमान है कि MSP में बढ़ोतरी से देशभर के किसानों को करीब 2.6 लाख करोड़ रुपये तक का फायदा मिल सकता है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला कृषि क्षेत्र में निवेश और उत्पादन दोनों को बढ़ावा देगा।
एक ओर MSP बढ़ने से किसानों को राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर कई राज्यों में किसान मौसम की मार झेल रहे हैं। बिहार, पंजाब और हरियाणा के कई इलाकों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान पहुंचा है। किसान संगठनों ने प्रभावित किसानों के लिए राहत पैकेज और उचित मुआवजे की मांग की है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने भी किसानों को बड़ी राहत देते हुए गेहूं खरीद प्रक्रिया को आसान बनाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की है कि अब किसान बिना ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के भी सरकारी खरीद केंद्रों पर गेहूं बेच सकेंगे। इस फैसले से छोटे और ग्रामीण इलाकों के किसानों को काफी सुविधा मिलने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर 13 मई 2026 किसानों के लिए महत्वपूर्ण दिन साबित हुआ। MSP बढ़ोतरी से किसानों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों की समस्याएं अब भी सरकार के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।