आया है। यहां कई खदानों की लीज समाप्त हो चुकी है, लेकिन उन्हें नियमों के अनुसार सुरक्षित रूप से बंद नहीं किया गया है।
ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र में 100 से 150 फीट गहरी खदानें बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के खुली पड़ी हैं, जो किसी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं। इन खदानों के आसपास न तो फेंसिंग की गई है और न ही चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं, जिससे जानवरों और स्थानीय लोगों के लिए खतरा लगातार बना हुआ है।
चालू खदानों में काम कर रहे श्रमिक भी बिना हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट और अन्य सुरक्षा उपकरणों के काम करने को मजबूर हैं। इससे श्रम सुरक्षा नियमों की गंभीर अनदेखी सामने आ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि खनन और श्रम विभाग की लापरवाही के कारण हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं।
स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि यदि कोई बड़ा हादसा होता है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। खदान मालिक, खनिज विभाग या श्रम विभाग—इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं है। ग्रामीणों ने जल्द से जल्द सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की मांग की है।
जानकारी के अनुसार कई बार शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। वहीं विभागीय प्रतिक्रिया न मिलने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
नियमों के अनुसार लीज समाप्त होने के बाद खदानों को सुरक्षित तरीके से बंद किया जाना चाहिए, लेकिन स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई कर खदानों को सुरक्षित करने और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।