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कटनी जिले के स्लीमनाबाद क्षेत्र अंतर्गत छपरा गांव में मार्बल खदानों की लापरवाही उजागर

कटनी जिले के स्लीमनाबाद क्षेत्र के छपरा गांव में मार्बल खदानों की गंभीर लापरवाही सामने आई है। कई बंद पड़ी खदानों की लीज समाप्त होने के बावजूद उन्हें सुरक्षित रूप से बंद नहीं किया गया है, जिससे 100 से 150 फीट गहरे खुले गड्ढे हादसों को न्योता दे रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार खदानों के आसपास न तो फेंसिंग है और न ही चेतावनी बोर्ड। वहीं चालू खदानों में श्रमिक बिना सुरक्षा उपकरणों के काम कर रहे हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।

By: Nivedita 
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कटनी जिले के स्लीमनाबाद क्षेत्र अंतर्गत छपरा गांव में मार्बल खदानों की लापरवाही उजागर

आया है। यहां कई खदानों की लीज समाप्त हो चुकी है, लेकिन उन्हें नियमों के अनुसार सुरक्षित रूप से बंद नहीं किया गया है।

100 से 150 फीट गहरे खुले गड्ढे बन रहे खतरा

ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र में 100 से 150 फीट गहरी खदानें बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के खुली पड़ी हैं, जो किसी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं। इन खदानों के आसपास न तो फेंसिंग की गई है और न ही चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं, जिससे जानवरों और स्थानीय लोगों के लिए खतरा लगातार बना हुआ है।

सुरक्षा नियमों की खुलेआम अनदेखी

चालू खदानों में काम कर रहे श्रमिक भी बिना हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट और अन्य सुरक्षा उपकरणों के काम करने को मजबूर हैं। इससे श्रम सुरक्षा नियमों की गंभीर अनदेखी सामने आ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि खनन और श्रम विभाग की लापरवाही के कारण हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं।

ग्रामीणों में बढ़ी चिंता, प्रशासन पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि यदि कोई बड़ा हादसा होता है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। खदान मालिक, खनिज विभाग या श्रम विभाग—इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं है। ग्रामीणों ने जल्द से जल्द सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की मांग की है।

विभागीय उदासीनता पर भी सवाल

जानकारी के अनुसार कई बार शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। वहीं विभागीय प्रतिक्रिया न मिलने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

सुरक्षा व्यवस्था सुधार की जरूरत

नियमों के अनुसार लीज समाप्त होने के बाद खदानों को सुरक्षित तरीके से बंद किया जाना चाहिए, लेकिन स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई कर खदानों को सुरक्षित करने और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।

 

 

 

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