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रामकाज और सामाजिक समरसता को समर्पित रहा महंत अवेद्यनाथ का जीवन

गोरखनाथ मंदिर में राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत देशभर के संत-धर्माचार्य कार्यक्रम में शामिल होंगे।

By: BS Yadav 
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रामकाज और सामाजिक समरसता को समर्पित रहा महंत अवेद्यनाथ का जीवन

गोरखपुर : गोरक्षपीठ के राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि पर बुधवार को गोरखनाथ मंदिर में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन होगा। मुख्यमंत्री और गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ अपने पूज्य गुरुदेव को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। देशभर से संत-धर्माचार्य भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। महंत अवेद्यनाथ का जीवन रामकाज, सामाजिक समरसता, शिक्षा और राष्ट्रसेवा को समर्पित रहा। आइए जानते हैं उनके जीवन और योगदान की पूरी कहानी।

रामकाज को समर्पित रहा जीवन

गोरक्षपीठ में आयोजित साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह का समापन बुधवार, 30 सितंबर को होगा। आश्विन कृष्ण चतुर्थी के अवसर पर गोरखनाथ मंदिर स्थित महंत दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने गुरु और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज को श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे। देशभर से प्रतिष्ठित संत और धर्माचार्य भी कार्यक्रम में शामिल होंगे। 18 मई 1919 को उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र के ग्राम कांडी में जन्मे महंत अवेद्यनाथ का बचपन से ही धर्म और अध्यात्म की ओर गहरा झुकाव था। गोरक्षपीठ में उन्हें महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज का सानिध्य मिला और 8 फरवरी 1942 को उन्होंने विधिवत दीक्षा ग्रहण की। वर्ष 1969 में महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की चिरसमाधि के बाद उन्होंने गोरखनाथ मंदिर के महंत और पीठाधीश्वर के रूप में जिम्मेदारी संभाली।

श्रीराम मंदिर आंदोलन के प्रमुख संत नेताओं में रहे

महंत अवेद्यनाथ का जीवन श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के संकल्प से भी गहराई से जुड़ा रहा। 21 जुलाई 1984 को अयोध्या के वाल्मीकि भवन में श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति का गठन हुआ और महंत अवेद्यनाथ को इसका अध्यक्ष चुना गया। इसके बाद उन्होंने विभिन्न मत-पंथों के संतों और धर्माचार्यों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया। नब्बे के दशक में उनके नेतृत्व में श्रीराम मंदिर आंदोलन को व्यापक स्वरूप मिला और आंदोलन गांव-गांव तक पहुंचा। श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति और श्रीराम जन्मभूमि निर्माण उच्चाधिकार समिति के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने संतों, राजनीतिज्ञों और आमजन को आंदोलन से जोड़ने में भूमिका निभाई। आगे चलकर उनके शिष्य और वर्तमान गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण का कार्य पूर्णता तक पहुंचा।

सामाजिक समरसता के लिए चलाया अभियान

महंत अवेद्यनाथ ने सामाजिक समरसता को अपने जीवन का प्रमुख उद्देश्य बनाया। हिंदू समाज में छुआछूत और ऊंच-नीच के भेदभाव को दूर करने के लिए उन्होंने लगातार अभियान चलाया। दलित बस्तियों में सहभोज के जरिए उन्होंने सामाजिक एकता का संदेश दिया। काशी में डोमराजा के घर संतों और साधु समाज के साथ भोजन कर उन्होंने जातिगत भेदभाव के खिलाफ संदेश दिया। दक्षिण भारत के मीनाक्षीपुरम में दलित समाज के सामूहिक धर्मांतरण की घटना के बाद उन्होंने सामाजिक कुरीतियों और जातिगत विभाजन को दूर करने पर विशेष जोर दिया। उनका प्रयास था कि समाज के अलग-अलग वर्ग आपसी भेदभाव से ऊपर उठकर एकजुट हों।

श्रीराम और मां दुर्गा के उदाहरण से समझाते थे एकता की ताकत

नाथपंथ और गोरक्षपीठ के अध्येता डॉ. प्रदीप कुमार राव के अनुसार, महंत अवेद्यनाथ सामाजिक समरसता का संदेश बेहद सरल उदाहरणों के जरिए देते थे। वह प्रभु श्रीराम के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए शबरी के बेर खाने, निषादराज को गले लगाने और वनवासियों के साथ आत्मीय संबंधों की चर्चा करते थे। वहीं देवी दुर्गा की आठ भुजाओं का उदाहरण देते हुए वह समाज के अलग-अलग वर्गों की एकता को सामूहिक शक्ति का प्रतीक बताते थे। उनका मानना था कि समाज के विभिन्न वर्ग जब एकजुट होते हैं तो उनकी सामूहिक शक्ति कई गुना बढ़ जाती है।

शिक्षा और राजनीति में भी छोड़ी अमिट छाप

महंत अवेद्यनाथ ने शिक्षा के क्षेत्र में भी अपने गुरुदेव महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की विरासत को आगे बढ़ाया। महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद को उन्होंने व्यापक स्वरूप दिया। इसके अंतर्गत प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा, चिकित्सा, तकनीकी और सेवा से जुड़े संस्थान संचालित हो रहे हैं। राजनीतिक जीवन में भी उनका लंबा सफर रहा। उन्होंने 1962, 1967, 1969, 1974 और 1977 में मानीराम विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। इसके बाद 1970, 1989, 1991 और 1996 में गोरखपुर सदर से सांसद रहे। राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, भारतीय संस्कृति, शिक्षा और हिंदू समाज की एकता जैसे मुद्दे उनके सार्वजनिक जीवन के प्रमुख विषय रहे। महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि पर होने वाली श्रद्धांजलि सभा उनके धार्मिक, सामाजिक, शैक्षिक और राजनीतिक योगदान को स्मरण करने का अवसर होगी। गोरक्षपीठ में जुटने वाले संत-धर्माचार्य और श्रद्धालु राष्ट्रसंत को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

अंकित श्रीवास्तव की रिपोर्ट

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