गोरखपुर के प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर में नवरात्र के पावन अवसर पर आस्था, श्रद्धा और परंपरा का विशेष संगम देखने को मिला। मंदिर परिसर स्थित भीम सरोवर से कलश में जल भरने के साथ धार्मिक अनुष्ठान की प्रक्रिया आगे बढ़ी। योगी कमलनाथ जी भीम सरोवर से कलश में जल भरकर ले जाते हुए दिखाई दिए। इसके बाद गोरक्षपीठाधीश्वर एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री महंत योगी आदित्यनाथ जी महाराज ने गोरखनाथ मंदिर के शक्तिपीठ में विधि-विधान के साथ कलश स्थापना की। नवरात्र में कलश स्थापना को शक्ति की आराधना, शुभता और आध्यात्मिक साधना का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है।
भीम सरोवर से शक्तिपीठ तक पहुंचा पवित्र जल
गोरखनाथ मंदिर में धार्मिक परंपराओं के निर्वहन के साथ नवरात्र की पूजा-अर्चना का क्रम आगे बढ़ा। मंदिर परिसर स्थित भीम सरोवर से कलश में जल भरकर ले जाने का दृश्य इस धार्मिक आयोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। योगी कमलनाथ जी कलश में जल लेकर आगे बढ़े। मंदिर की परंपराओं में धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व है। नवरात्र के दौरान मां दुर्गा की आराधना के साथ शक्ति की उपासना की जाती है। कलश को पवित्रता, मंगल और शुभ संकल्प का प्रतीक माना जाता है। इसी धार्मिक मान्यता के अनुरूप कलश स्थापना की प्रक्रिया संपन्न की गई।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की कलश स्थापना
गोरखनाथ मंदिर के भीम सरोवर से कलश में जल लाने के बाद गोरखनाथ मंदिर स्थित शक्तिपीठ में विधि-विधान के साथ कलश स्थापना की गई। गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी महाराज ने वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों के बीच कलश स्थापित किया। नवरात्र के पावन अवसर पर गोरखनाथ मंदिर में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। भीम सरोवर से जल लाने से लेकर शक्तिपीठ में कलश स्थापना तक की प्रक्रिया मंदिर की परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी हुई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गोरखनाथ मंदिर से गहरा आध्यात्मिक और पारंपरिक जुड़ाव रहा है। गोरक्षपीठाधीश्वर के रूप में वह मंदिर की धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते हैं। नवरात्र के दौरान शक्तिपीठ में होने वाली पूजा-अर्चना और अनुष्ठान श्रद्धा, साधना तथा आध्यात्मिक आस्था का प्रतीक माने जाते हैं। कलश स्थापना को नवरात्र की पूजा-पद्धति का एक महत्वपूर्ण चरण माना जाता है। इसके साथ ही मां दुर्गा की आराधना और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम आगे बढ़ता है। नवरात्र का पर्व मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना को समर्पित है। इन नौ दिनों में श्रद्धालु व्रत, पूजा-पाठ, मंत्रोच्चार और साधना के माध्यम से मां दुर्गा की आराधना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलश को शुभता, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। कलश स्थापना के साथ श्रद्धालु मां दुर्गा से परिवार की सुख-शांति, समृद्धि, आरोग्य और जनकल्याण की कामना करते हैं। गोरखनाथ मंदिर में संपन्न हुआ यह अनुष्ठान नवरात्र की धार्मिक परंपरा और आस्था की निरंतरता को दर्शाता है।

नवरात्र में गोरखनाथ मंदिर का विशेष धार्मिक महत्व
गोरखनाथ मंदिर केवल गोरखपुर ही नहीं, बल्कि पूर्वांचल के प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक केंद्रों में गिना जाता है। यहां होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों का श्रद्धालुओं के बीच विशेष महत्व है। नवरात्र के अवसर पर मंदिर की परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना और शक्ति की उपासना की जाती है। भीम सरोवर से जल लाने से लेकर शक्तिपीठ में कलश स्थापना तक की प्रक्रिया ने आयोजन के धार्मिक स्वरूप को सामने रखा। कलश स्थापना के साथ ही मां दुर्गा की आराधना के प्रति श्रद्धा और आस्था का संदेश भी दिखाई दिया। गोरखनाथ मंदिर में भीम सरोवर से कलश में जल लाने और शक्तिपीठ में कलश स्थापना की यह परंपरा नवरात्र की धार्मिक महत्ता को दर्शाती है। गोरक्षपीठाधीश्वर महंत योगी आदित्यनाथ के द्वारा विधि-विधान से की गई कलश स्थापना के साथ मंदिर में शक्ति की उपासना का क्रम आगे बढ़ा।
रिपोर्ट : अंकित श्रीवास्तव