उत्तराखंड का पारंपरिक पर्व इगास, जिसे बूढ़ी दिवाली भी कहा जाता है, राज्य के लोगों के लिए आस्था, संस्कृति और वीरता का प्रतीक है। यह पर्व विशेष रूप से गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्रों में दिवाली के 11 दिन बाद बड़े हर्षोल्लास से मनाया जाता है।
उत्तराखंड का पारंपरिक पर्व इगास, जिसे बूढ़ी दिवाली भी कहा जाता है, राज्य के लोगों के लिए आस्था, संस्कृति और वीरता का प्रतीक है। यह पर्व विशेष रूप से गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्रों में दिवाली के 11 दिन बाद बड़े हर्षोल्लास से मनाया जाता है।
हिंदू कैलेंडर में सबसे शुभ दिनों में से एक देव एकादशी(देव उठनी) को पूरे भारत में, खास तौर पर भगवान विष्णु के भक्तों द्वारा श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है। यह पवित्र दिन कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष (चंद्रमा चरण) की एकादशी (11वें दिन) को पड़ता है, जो आमतौर पर नवंबर में होता है।
उत्तराखंड में छठ पूजा के अवसर पर श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर रहा। चार दिवसीय इस महापर्व के अंतिम दिन व्रतियों ने उगते सूर्य को अर्घ्य देकर पर्व का समापन किया।
छठ पूजा 2024 का शुभारंभ आज मंगलवार से नहाय-खाय के साथ हो रहा है। लखनऊ में इस महापर्व के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मुख्य आयोजन 7 नवंबर को लक्ष्मण मेला स्थल पर होगा, जहां शाम 5 बजे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ छठोत्सव का उद्घाटन करेंगे।
मथुरा और ब्रज के मंदिरों एवं घरों में आज गोवर्धन पूजा और अन्नकूट महोत्सव बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। दिन में कच्चा प्रसाद बनाकर आराध्य को अर्पित किया जाएगा।
इस वर्ष दिवाली की तारीख को लेकर लोगों में असमंजस था। इसी बीच, श्रीराम मंदिर और काशी विश्वनाथ मंदिर का मुहूर्त देने वाले पंडित गणेश्वर शास्त्री द्राविड़ ने इस भ्रम को दूर किया और बताया कि दिवाली 1 नवंबर को मनाई जाएगी।
उज्जैन के महाकाल मंदिर में 29 अक्टूबर से पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत होगी। इस दौरान भगवान महाकाल की विशेष पूजा की जाएगी, जिसमें हर दिन अलग-अलग धार्मिक रस्मों का पालन किया जाएगा। 31 अक्टूबर को विशेष रूप से पांच आरती में भगवान की फुलझड़ियों के साथ पूजा होगी।
सनातन धर्म में तुलसी विवाह का बहुत ही विशेष महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु के शालिग्राम रूप के साथ तुलसी जी का विवाह कराया जाता है। आइए जानते हैं इस साल कब है तुलसी विवाह और इस शुभ मुहूर्त के बारे में।
कृष्ण भगवान ने कहा- बहना, इसी तरह का प्रश्न एक बार माता पार्वती ने शंकरजी से किया था। तब शंकरजी ने माता पार्वती को करवा चौथ का व्रत बतलाया। इस व्रत को करने से स्त्रियां अपने सुहाग की रक्षा हर आने वाले संकट से वैसे ही कर सकती हैं जैसे एक ब्राह्मण ने की थी।
दिवाली का पर्व कार्तिक मास के अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की उपासना की जाती है। इस दिन भगवान राम लंका पर विजय प्राप्त कर अयोध्या वापिस लौटे थे, जिसकी खुशी में सभी अयोध्या नगरवासियों ने दीपक जलाए थे।
उज्जैन के विश्वप्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर के लड्डू प्रसाद के पैकेट में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद, मंदिर प्रबंध समिति ने प्रसाद के पैकेट से ओम (ॐ) और मंदिर शिखर की तस्वीर हटाने का निर्णय लिया है।
आज शारदीय नवरात्रि का तीसरा दिन है, और मध्य प्रदेश सहित पूरे देश में मां दुर्गा की भव्य झांकियों की सजावट की गई है। राजधानी भोपाल में, श्रद्धालुओं के लिए अयोध्या के श्री राम मंदिर के समान मां दुर्गा का एक भव्य पंडाल सजाया गया है।
शारदीय नवरात्रि शुरू हो चुकी है। इस वर्ष मां दुर्गा पालकी पर सवार होकर आ रही हैं और प्रस्थान मुर्गे पर हो रहा है। कहते हैं कि माता रानी के हर वाहन का अलग अर्थ होता है। तो चलिए जानते हैं कि माता का पालकी पर सवार होकर आना देश-दुनिया के लिए शुभ है या अशुभ।
आज नवरात्रि का दूसरा दिन है। इस दिन भक्तजन मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी रूप की पूजा करते हैं। नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का बहुत महत्व है। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से मां प्रसन्न होती हैं।आइए विस्तार से जानते हैं मां ब्रह्मचारिणी की पूजाविधि, उनका प्रिय भोग, पूजा मंत्र और आरती।
पितृ पक्ष में पितरों के निमित्त तर्पण और श्राद्ध किया जाता है। श्राद्ध का भोजन दोपहर में कराया जाता है। लेकिन क्या आप इसकी वजह जानते हैं? जानिए इस पोस्ट में इसके बारे में..