गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान श्रीगणेश के जन्म उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन गणपति बप्पा के मंदिरों को भव्य रूप में सजाया जाता है और गणेश उत्सव की शुरुआत होती है। दस दिनों तक चलने वाले इस पर्व का समापन अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन के साथ होता है। आइए आज इस पोस्ट के माध्यम से जानते हैं कि गणेश चतुर्थी पर क्या करें और क्या ना करें, साथ ही बप्पा की पूजा के सही नियम क्या हैं…
शास्त्रों के मुताबिक माता पार्वती ने गणेश जी की मूर्ति मिट्टी की ही बनाई थी जिसमें शिव जी ने बाद में प्राण डाला था। वहीं दूसरा कारण गणेश जी की मूर्ति को मिट्टी से बनाने का यह है कि मिट्टी से बनी प्रतिमा में जीवन के लिए जरूरी सभी पांच तत्व भूमि, जल, वायु, अग्नि और आकाश शामिल होते हैं। इस तरह से बप्पा का जन्म हुआ।
पंचांग के अनुसार 7 सितंबर सुबह 11 बजकर 3 मिनट से लेकर दोपहर के 1 बजकर 34 मिनट तक यानी करीब 2 घंटे का समय शुभ मुहूर्त का समय होगा। इस दौरान आप गणपति बप्पा की पूजा अर्चना कर सकते हैं और अपने स्वास्थ्य के लिए वर मांग सकते हैं।
गणेश चतुर्थी पर अपने घर में भूलकर भी गणपति जी की आधी-अधूरी बनी या फिर खंडित मूर्ति की स्थापना या पूजा न करें। ऐसा करना अशुभ माना जाता है। आपके जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
THIS POST IS WRITTEN BY SHREYASI